पुरूष प्रधान कहे जाने वाले समाज में हमारे देश में न जाने कितनी ही ऐसी नारी शक्तिया है, जिनके साहस, और कुछ कर गुजरने के जज्बे ने उन्हें एक अलग ही स्थान दिलवाया है। हमारा देश आज तेजी से प्रगति कर रहा है। पितृ सत्ता को छोड़कर हम समानता की डगर पर आगे बढ़ रहे है। ऐसी ही एक बहादुर महिला की कहानी असम के दुलियाजान से सामने आई है। दुलियाजान की स्वर्णा गोगोई चेतिया पेशे से एक ई- रिक्शा चालक है। स्वर्णा 2014 से ई-रिक्शा चला रही है।

खुद के दम पर बनाई पहचान

तमाम आलोचनाओं और असफलताओं से लड़ते हुए स्वर्णा ने किस प्रकार अपनी बहादुरी और मेहनत के बल पर एक ई-रिक्शा ड्राइवर के रूप में अपनी पहचान बनाई, यह अपने आप में प्रेरणादायी है। दो बच्चो की माँ स्वर्णा अपने काम और परिवार को बखूबी जोश और आत्मविश्वास के साथ संभालती है।

परिवार की खातिर उठाया ये कदम

स्वर्णा ने परिवार के अच्छे भविष्य और आर्थिक स्थिति के लिए उन्होंने रिक्शा चलाने का विकल्प चुना। शुरूआती दिनों में हमे कई चेतावनियों का सामना करना पड़ा।  परन्तु परिवार ही मेरी प्रेरणा शक्ति है। उनका कहना है कि वो अपने बच्चे और उनके अच्छे भविष्य के लिए उन्होंने ई-रिक्शा चलाना जारी रखा। स्वर्णा कहती है मैं लगातार 5 साल से ई-रिक्शा चला रही हूूूं और तब से जिंदगी में सब अच्छा चल रहा है।

अपने दिन के कार्यक्रम को साझा करते हुए चेतिया ने कहा कि हर दिन सुबह 4 बजे उठती हूँ  और व्यवसाय के लिए अपना वाहन निकालती हूँ। कभी-कभी व्यवसाय अच्छा होता है, तो कभी नहीं। दरअसल स्वर्णा के आत्मनिर्भर होने ने उन्हें आर्थिक तंगी से दूर तो किया है ही साथ ही उन्हें न जाने कितनी ही महिलाओ की प्रेरणा शक्ति बना दिया। स्वर्ण जैसी महिलायें सपनो का पालन करते हुए, अपनी शर्तो पर जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है।