असम के तिनसुकिया में एक 70 साल कि बुजुर्ग महिला ने आत्महत्या कर ली क्योंकि उसके बहू आैर बेटे को डी-वोटर घोषित कर उन्हें डिटेशन सेंटर में डाल दिया गया था। उत्तर प्रदेश की बलिया की चकोटी देवी का परिवार 1945 से असम के तिनसुकिया में रह रहा था। चकाेटी देवी अपने बेटे दिनेश प्रजापति, बहू सरिता प्रजापति आैर पांच पोते पातियों के साथ रह रही थी। 

तिनसुकिया जिले के आल असम भोजपुरी परिषद के अध्यक्ष मोहन कुमार शाह ने एक अंग्रेजी समाचार पत्र को बताया कि पिछले दिनों में प्रजापति दम्पत्ति को फाॅरेन ट्रिब्यूनल से समन भेजा गया था। समन मिलने के बाद वे अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कोर्ट में समय से उपस्थित न हो पाएं जिसके कारण उन्हें डी वोटर घोषित कर दिया गया आैर डिटेंशन सेंटर में भेज दिया गया।


हाल ही में हिंदी भाषी समुदाय के कर्इ संगठनों ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की आैर उनसे अपील की है कि हिंदी भाषी लोगों को एनआरसी में शामिल किया जाए। बता दें कि एनआरसी के अंतिम मसौदे में बड़ी सख्या में हिंदी भाषी लोगों को शामिल नहीं किया गया है।

गौरतलब है कि 30 जुलार्इ  2018 को जारी किए गए एनअारसी के अंतिम मसौदे में 2,89, 83,677 लोगों के नामों को शामिल किया गया है। जबकि 4,007,707 लोगों के नाम इस लिस्ट से बाहर हैंं।

राज्य के चुनाव विभाग ने जिला चुनाव अधिकारियों से अपने संबंधित क्षेत्रों से डी वोटर्स की लिस्ट तैयार करने को कहा हैं। बता दें कि एेसे कर्इ उदाहरण है कि फाॅरेन ट्रिब्यूनल के द्वारा मंजूरी मिलने के बाद भी कर्इ लोगाें को एनआरसी के अंतिम मसौदे में शामिल नहीं किया गया हैं।