असम में मंगलदोई संसदीय क्षेत्र के डलगांव में एक बूथ पर चुनाव अधिकारियों ने महिला को दोबारा मतदान करने की अनुमति प्रदान की। महिला ने शिकायत की थी कि एक चुनाव अधिकारी ने उसे उस पार्टी को वोट करने के लिए मजबूर किया जिसका वह समर्थन नहीं करती। दूसरे चरण के चुनाव में मंगलदोई संसदीय सीट के लिए गुरुवार को मतदान हुआ। मालेका खातून ने सारिसबाड़ी पोलिंग स्टेशन पर दूसरी बार मतदान के बाद कहा, एक पोलिंग पर्सनल ने मुझे उस पार्टी के लिए वोट करने को मजबूर किया जिसका मैं समर्थन नहीं करता लेकिन जब मैंने विरोध किया तो उन्होंने मुझे दोबारा मतदान करने दिया।

जोनल अधिकारी जयंता मेधी ने कहा, उसे टेंडर वोट डालने की अनुमति दी गई थी। इस तरह के वोट का अधिकार उसेहोता है जब उसे पता चलता है कि किसी ने उसके नाम पर पहले ही वोट डाल दिया है। टेंडर वोट बैलेट पेपर्स के जरिए डाले जाते हैं जो बाद में सील कर लॉक कर दिए जाते हैं। अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के मतों की गिनती के लिए नियम कायदे हैं। दरंाग जिले के उपायुक्त घनश्याम दास ने कहा कि पोलिंग स्टेशन से किसी तरह की शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। आपको बता दें कि असम में लोकसभा की कुल 14 सीटें हैं। पहले चरण में पांच सीटों के लिए 11 अप्रेल को वोटिंग हुई थी। दूसरे चरण में भी पांच सीटों के लिए गुरुवार को मतदान हुआ। तीसरे व आखिरी चरण में चार सीटों के लिए 23 अप्रेल को वोटिंग होगी। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 7 सीटें जीती थी।

कांग्रेस व एआईयूडीएफ के खाते में 3-3 सीटें आई थी। उस वक्त एआईयूडीएफ ने 6 सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन इस बार वह सिर्फ 3 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। तीनों मुस्लिम बहुल सीटें हैं। भाजपा इस बार 10 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। चार सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ी है। तीन सीटों पर असम गण परिषद जबकि एक सीट पर बीपीएफ चुनाव लड़ रही है। असम गण परिषद ने नागरिकता (संशोधन)विधेयक के विरोध में भाजपा से गठबंधन तोड़ दिया था लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले उसने फिर से भाजपा से हाथ मिला लिया।