धिंग से विधायक अमिनुल इस्लाम ने टीईटी टीचर ऊषा दास के प्रताडऩा के आरोपों की मजिस्ट्रेट लेवल की जांच की मांग की। असम विधानसभा में अमिनुल इस्लाम ने कहा कि ऊषा दास का बयान संदिग्ध है क्योंकि वह स्कूल से ट्रांसफर चाहती थी।

इस्लाम ने कहा, दोषियों को सजा मिलनी चाहिए लेकिन उसका बयान भी संदिग्ध है क्योंकि वह फिलहाल जिस स्कूल में नियुक्त है वहां से ट्रांसफर चाहती थी। मामले पर अपनी चिंता को व्यक्त करते हुए इस्लाम ने कहा कि लहारीघाट उनके विधानसभा क्षेत्र में आता है। हो सकता है कि ऊषा दास ने स्कूल से ट्रांसफर के लिए स्थानीय लोगों व साथी शिक्षकों पर प्रताडि़त करने का आरोप लगाया हो। कामरुप जिले के सोनापुर की रहने वाली ऊषा दास ने आरोप लगाया था कि दो वरिष्ठ सहयोगियों ने उस पर बीफ खाने और इस्लाम कबूल करने के लिए दबाव बनाया। यही नहीं उसे बलात्कार और हत्या की धमकी भी दी गई।

ऊषा दास ने मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल और शिक्षा मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को पत्र लिखकर अपनी व्यथा बताई थी। पत्र में दास ने बताया कि था प्रताडऩा के कारण उसने स्कूल जाना छोड़ दिया है। ऊषा दास ने पत्र में ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर और डिप्टी कमिश्नर के खिलाफ शिकायत की थी। दास का आरोप है कि दोनों न
कोई कार्रवाई नहीं की। मोरीगांव के डिप्टी कमिश्नर हेमन दास ने कहा था कि हमने स्कूलों के इंस्पेक्टर को टीचर के संबंध में एकेडमिक जांच के लिए कहा है, कि वह रेगुलर थी या नहीं। हमने पुलिस अधीक्षक से उन आरोपों की जांच करने करने को कहा है जिसमें बीफ खाने व इस्लाम कबूल करने के लिए दबाव बनाने की बात कही गई है।

आरोप क्रिमिनल नेचर के हैं इसलिए हम मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। बकौल दास, शुरुआत में मैंने इसे बहुत हल्के में लिया क्योंकि मैंने सोचा था कि स्थिति में सुधार हो जाएगा। हालांकि स्थिति बद से बदतर  हो गई। मेरा एक वरिष्ठ सहयोगी लगातार मुझे इस्लाम कबूल कर उससे शादी के लिए कहता रहा। जब मैंने हेडमास्टर को शिकायत की तो उन्होंने भी उसका साथ दिया। हेड मास्टर और उनकी पत्नी जो पास में ही रहते हैं ने मुझे बीफ खाने के लिए मजबूर किया। जब मैंने स्कूल मैनेजमेंट कमेटी को शिकायत की तो कमेटी के कुछ सदस्यों ने मुझे यह कहते हुए हड़काया कि मैं हेडमास्टर और अन्य शिक्षक की छवि खराब करने की कोशिश कर रही हूं।

दास ने बताया कि उसने ब्लॉक ऑफिसर और डिप्टी कमिश्नर से सुरक्षित जगह पर ट्रांसफर के लिए अनुरोध किया लेकिन कुछ नहीं हुआ। ऊषा दास ने पिछले साल जुलाई में मोरीगांव जिले में स्थित सरकारी स्कूल ज्वाइन किया था। स्कूल दूरदराज इलाके में स्थित है और इलाका मुस्लिम बहुल है। मंगलवार को दास ने आरोप लगाया कि उसे प्रताडि़त किया गया। उसके साथ छेडख़ानी की गई। उसे साथियों ने बलात्कार और हत्या की धमकी दी। बकौल दास, मैंने तीन महीने तक समस्याओं का सामना किया। 20 दिन पहले मैंने स्कूल जाना छोड़दिया। हेडमास्टर नुरुल इस्लाम और उसकी पत्नी ने मुझे बीफ खिलाने की कई बार कोशिश की लेकिन मैंने इनकार कर दिया। जब उन्हें और   मेरे साथी टीचर को पता चला कि मैंने ट्रांसफर कराना चाहती हूं तो उन्होंने मुझे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।

उन्होंने धमकी दी कि स्कूल के बाहर मेरा बलात्कार हो सकता है और हत्या हो सकती है। मोरीगांव के डिप्टी कमिश्नर हेमेन दास ने कहा कि 2 सितंबर को स्कूल के हेडमास्टर ने पुलिस को मौखिक शिकायत की थी। उसने आरोप लगाया था कि ऊषा दास ने उस पर ट्रांसफर के लिए दबाव बनाया। ऊषा ने धमकी दी कि अगर मैंने ऑब्लाइज नहीं किया तो वह आत्महत्या कर लेगी। हेडमास्टर ने यह कहते हुए एफआईआर दर्ज नहीं कराई कि
यह स्कूल का आंतरिक मामला है, जिसे इंटरनली सुलझा लिया जाएगा लेकिन उसका बयान बहुत गंभीर है। यह पुलिस थाने की जनरल डायरी में दर्ज हो गया है।

स्कूलों के इंस्पेक्टर यह जांच करेगें कि ऊषा दास ने हेडमास्टर पर ट्रांसफर के लिए दबाव बनाया था या नहीं। उसने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कोई शिकायत की थी या नहीं। वह स्कूल में रेगुलर है या नहीं। पुलिस इस बात की भी जांच करेगी कि उस पर बीफ खाने और भागने के लिए दबाव बनाया गया या नहीं। उससे छेडख़ानी की गई या नहीं या उस पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई या नहीं।