टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंसेज औऱ आक्सफैम इंडिया की एक ताजा रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि असम के चाय बागानों में मजदूरों के अधिकारों का किस बड़े पैमाने पर उल्लंघन किया जा रहा है।

राज्य के 50 चाय बागानों के 510 मजदूरों से बातचीत के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 200 ग्राम चाय पत्ती का जो पैकेट 68 रुपए में बिकता है उसमें मजदूरों को सिर्फ पांच रुपए मिलते हैं। बाकी रकम बागान मालिकों और दुकानदारों के हिस्से में आती है।


एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि 12-13 घंटे काम करने के बावजूद बागान मजदूरों को रोजाना 137 से 167 रुपए ही मिलते हैं। इसके अलावा उनको बागानों में मौलिक सुविधाएं भी हासिल नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, असम सरकार ने बागान मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ा कर 351 रुपए करने की पहल की थी, लेकिन बागान प्रबंधन वित्तीय दिक्कतों की हवाला देकर इसके लिए सहमत नहीं हुआ।

मजदूरों के साथ हुआ वेतन समझौता बीते दिसबंर में खत्म होने के बावजूद अब तक इसका नवीनीकरण नहीं हुआ है। बागान मजदूरों के संगठन लंबे अरसे से न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की मांग में आंदोलन पर हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुरुषों के बराबर काम करने के बावजूद महिला मजदूरों को रोजाना 110 से 130 रुपए के बीच मजदूरी मिलती है।