नेता विरोधी दल देवब्रत सइकिया ने वन विभाग पर सीमाई इलाकों में पक्के खंभे बनाने औरइस पर पड़सी राज्यों के लोगों तथा एनएससीएन जैसे उग्रवादी संगठनों को असम की भूमि पर अवैध कब्जे के लिए उकसाने का गंभीर आरोप लगाया है। 

उनके मुताबिक वन विभाग की इस हरकत से सुप्रीम कोर्ट में सीमा विवाद को लेकर जारी मुकदमें पर असम का पक्ष कमजोर होगा। 

अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मेघालय और मिजोरम के साथ असम का सीमा विवाद बहुत पुराना है। असम और नागालैंड सीमा ससस्या पर सुप्रीम कोर्ट से अंतिम फैसला आना अभी बाकी है।

सइकिया के मुताबिक सीमाई इलाकों में राजस्व भूमि की तुलना में वन विभाग की जमीन पर नगा लोगों का अवैध अतिक्रमण अधिक हो रहा है। संयोग से अभी असम सरकार के वन विभाग औेर राजस्व विभाग की ओर से साझा जरीप(माप) नहीं हुई।

नेता विरोधी दल ने कहा कि ऐसे संधिकाल में राज्य के जोरहाट जिले के नागिनीजान सीमाई इलोके में अपने वन विभाग को ओर से स्थाई खंभे गाड़े जा रहे हैं। 

यह कार्य स्थानीय जिला प्रशासन, महकमा प्रशासन, राजस्व चक्राधिकारी अथवा स्थानीय लोगों और गांव बूढ़ा आदि को साथ में लिए बिना किया जा रहा है। यह किसी भी तरह से असम के हित में नहीं है।