भाजपा सरकार को असम संम्मिलित महासंघ ने कहा है कि एनआरसी का फाइनल ड्राफ्ट 31 अगस्त को प्रकाशित करना संभव नहीं है। यह असम में स्थित अन्य सभी समूहों का महासंघ है जिसको सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी एनआरसी की फाइनल तारीख पर प्रकाशित होने पर संशय है।

राज्य में रह रहे विदेशी लोगों के लिए असम ने एनआरसी के लिए आखिरी तारीख 25 मार्च 1971 को संवैधानिक वैधता मानने पर चुनौती दी है। राज्य का कहना है कि उसकी मांग है कि 1951 को आधार मानकर असम एनआरसी का प्रकाशन किया जाए। इस मामले को लेकर ASM वर्किंग कमेटी के अध्यक्ष Motiur Rahman ने कहा है इसको लेकर एक पीटिशन संवैधानिक बैंच में दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि एनआरसी के लिए 1951 को बैसिक आधार माना जाए।

रहमान ने कहा है कि 1971 को असम एनआरसी के लिए आधार मानना उचित नहीं तथा यह यहां रहने वाले मूल निवासियों के अधिकारों का हनना होगा। क्योंकि 1951 से लेकर 1971 के समय पश्चिमी पाकिस्तान से बांग्लादेश बनते समय कई शरणार्थी यहां बस चुके थे जो कि यहां के मूल निवासी नहीं हो सकते।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि असम एनआरसी के फाइनल ड्राफ्ट का प्रकाशन 31 अगस्त 2019 को किया किया जाए।