असम संग्रामी मंच ने लोकसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा होने के ठीक 24 घंटे बाद सरकार से कहा है कि वह असमवासियों के जनादेश को नागरिकता विधेयक के समर्थन में दिया गया जनादेश समझने की गलती न करे। संग्रामी मंच के महासचिव समरज्योति बेजबरुवा ने शुक्रवार को गुवाहाटी प्रेस क्लब से आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में यह भी कहा कि विरोधियों के बीच विचार-भिन्नता और विश्वास योग्य व्यक्ति की कमी के कारण ही असम में नरेंद्र मोदी को इतनी बड़ी जीत हासिल हुई है।

बेजबरुवा ने राज्य में क्षेत्रीय राजनीतिक ताकतों को एकजुट किए जाने की जरूरत को रेखांकित करते हुए पड़ोसी राज्य ओडिशा और सिक्किम से सीख लेने की जरूरत बताई। उन्होंने आने वाले दिनों में गठित होने वाली केंद्र सरकार के समक्ष अपनी नौ सूत्री मांगों को भी प्रस्तुत किय। इन मांगों में खिलंजिया राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन कर असम समझौते को क्रियान्व्त करने के लिए शीघ्र कदम उठाने, असम को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने, एक्ट ईस्ट पाॅलिसी के तहत किए जा रहे निर्माण कार्य में तेजी लाने, असम सहित पूर्वोत्तर की विद्रोही समस्या के समाधान के लिए निःशर्त शांतिवार्ता, उच्चशिक्षा मद में पर्याप्त धनराशि आवंटित करना, पड़ोसी राज्यों के साथ चल रहे सीमा विवाद को सुलझाना, औद्योगिक विकास को गति देना आदि शामिल है।