असम पुलिस की एक टीम शुक्रवार को गुवाहाटी से नई दिल्ली पहुंची। टीम का नेतृत्व अजारा डिवीजन के एसीपी प्रांजल बोरा कर रहे हैं। एसआई चित्रा रंजन बुरागोहेन इसमें असिस्ट कर रही है। इस टीम ने जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी पर लगे आरोपों की प्राथमिक जांच शुरू कर दी है। साथ ही डॉ हिरेन गोहेन व हैदर हुसैन समेत असम के उन बुद्धिजीवियों के उस समूह के खिलाफ भी जांच शुरु की है जिन्होंने मदनी के साथ मंच साझा किया था और जिनकी मौजूदगी में मदनी ने कथित रूप से भड़काऊ बयान दिए थे। मदनी ने गत सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित एक सेमिनार में भड़काऊ व उत्तेजक बयान दिए थे। सेमिनार का आयोजन दिल्ली एक्शन कमेटी फॉर असम ने किया था।

सेमिनार में डॉ हिरेन गोहेन, मंजीत महंता, हैदर हुसैन, अपूर्बा बरुआ, हाफिज रशीद चौधरी मौजूद थे। अभी तक इसको लेकर स्पष्टता की कमी है कि दिल्ली एक्शन कमेटी फॉर असम की ओर से आयोजित कार्यक्रम को फंड किसने किया था। सेमिनार का आयोजन असम के ताजा हालात व एनआरसी पर चर्चा के लिए किया गया था। इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं कि मदनी ने ही मीटिंग के लिए फंड किया था। एसीपी बोरा ने नई दिल्ली में मीडिया कर्मियों से कहा कि दिल्ली पुलिस की मदद से वे विवादित मीटिंग की सच्चाई का पता करने की कोशिश करेंगे। अगर जरूरत पड़ी तो मदनी, डॉ गोहेन और अपूर्बा बरुआ से पूछताछ की जाएगी। मदनी ने सेमिनार में कथित रूप से कहा था कि एनआरसी अपडेशन के बाद अगर 30 लाख मुस्लिमों को बांग्लादेश भेजा गया तो असम जल उठेगा और रक्तपात होगा।
हालांकि मदनी ने गुरुवार को सफाई देते हुए कहा कि मीडिया में जैसा चल रहा है वैसा मैंने नहीं कहा था। अगर 30 लाख लोगों क उनकी नागरिकता के अधिकार से वंचित किया गया तो असम को म्यांमार जैसे हालात का सामना करना पड़ेगा। अगर ये लोग अपने अधिकारों से वंचित रहे तो बहुत तनावपूर्ण हालात उत्पन्न हो सकते हैं क्योंकि इन लोगों के पास रहने के लिए कोई जगह नहीं है। वे शिक्षा के अधिकार से भी वंचित रह जाएंगे। इन चीजों से राज्य में अशांति उत्पन्न हो सकती है, जो हम नहीं चाहते। हम राज्य के साथ साथ देश में भी शांति चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मुट्ठी भर लोग जो घृणा का इस्तेमाल कर राजनीतिक सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
ये लोग 30 लाख लोगों को उनके अधिकारों से वंचित कर असम में भी म्यांमार जैसे हालात पैदा करना चाहते हैं। मदनी ने कहा, मैं राज्य को आग में नहीं झोंकना चाहता बल्कि वे लोग ऐसा चाहते हैं जो यह कह रहे हैं कि कि मदनी ऐसा चाहते हैं। राज्य में सत्तारुढ़ भाजपा सरकार को निशाने पर लेते हुए मदनी ने कहा कि ये लोग असम में वे लोग हैं जो लोगों के बीच घृणा फैलाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। मदनी ने दावा किया कि असम के 99 फीसदी मुस्लिम भारतीय हैं। इनके पास वैध दस्तावेज हैं। असम में पहले भी पंचायत के दस्तावों को हमेशा स्वीकार किया गया है लेकिन नई सरकार इसे मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। जब उसे महसूस हुआ कि राज्य में जारी एनआरसी प्रोसेस में नागरिकता साबित करने के लिए ज्यादातर मुस्लिमों के पास वैध दस्तावेज हैं,तो उसने पंचायत की ओर से जारी दस्तावेजों को मुद्दा बनाने की कोशिश की।
मदनी ने कहा कि मैं भी चाहता हूं कि 1971 के बाद असम आए सभी लोगों को वापस भेजा जाए लेकिन जो लोग इससे पहले आए या जो लोग आजादी से पहले असम में रह रहे हैं, उन्हें परेशान नहीं करना चाहिए। आपको बता दें कि मदनी के खिलाफ 3 एफआई आर दर्ज की गई है। तीनों एफआईआर असम में एनआरसी अपडेशन की जारी प्रक्रिया को लेकर भड़काऊ बयान देने को लेकर दर्ज की गई है। मदनी के खिलाफ एक एफआईआर बसिस्था पुलिस थाने (गुवाहाटी),एक फतासिल पुलिस थाने(गुवाहाटी) और एक तेजपुर पुलिस थाने में दर्ज की गई है। असम पुलिस ने गुरुवार को पत्रकार व एक्टिविस्ट मंजीत महंता को समन जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया। मंजीत महंता को गुवाहाटी के फतासिल पुलिस थाने में रिपोर्ट करने के लिए कहा गया।
महंता से मदनी के नई दिल्ली में दिए गए कथित सांप्रदायिक बयानों को लेकर पूछताछ की जाएगी। फतासिल अंबारी पुलिस थाने के इंचार्ज दिलीप भाराली ने कहा कि उन्होंने महंता को पुलिस थाने में रिपोर्ट करने के लिए कहा है। पूरे मामले के संबंध में उनके बयान दर्ज किए जाएंगे। दिलीप भाराली ने कहा, उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार हैदर हुसैन से भी संपर्क किया है। फोन पर बात कर उनका बयान दर्ज किया है। असम के पुलिस महानिदेशक मुकेश सहाय ने बताया कि पुलिस मदनी की ओर से सोमवार को नई दिल्ली में एक सेमिनार के दौरान दिए गए बयानों की जांच कर रही है। कानून अपना काम करेगा।