असम एनआरसी की फाइनल लिस्ट से 19 लाख लोगों को बाहर करने वाले प्रतीक हाजेला के सुरक्षा को लेकर पुलिस ने नई बात कही है। पुलिस की तरफ से कहा गया है कि राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के समन्वयक प्रतीक हजेला को किसी तरह के खतरे की आशंका के बारे में पुलिस को कोई रिपोर्ट सौंपने के लिए नहीं कहा गया है।

सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र एवं राज्य सरकार को आदेश दिया था कि वो एनआरसी के समन्वयक प्रतीक हजेला को अधिकतम समय के लिए मध्य प्रदेश स्थानांतरित कर दें। एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि 1995 बैच के असम-मेघालय कैडर के आईएएस अधिकारी हजेला को किसी भी तरह के खतरे के बारे में राज्य पुलिस को जानकारी नहीं है।

इस बारे में पुलिस महानिरीक्षक (विशेष शाखा) हिरेन नाथ ने कहा कि हमसे हजेला को किसी भी तरह के खतरे की आशंका के बारे में रिपोर्ट नहीं मांगी गई है। हालांकि सोशल मीडिया पर हजेला के खिलाफ आलोचना की गई है। असम में एनआरसी और राज्य समन्वयक के खिलाफ बोलने पर विभिन्न संगठन मुखर है। सर्वोच्च न्यायालय ने एनआरसी कार्यक्रम पर निगरानी रखने के लिए हजेला को एनआरसी समन्वयक नियुक्त किया गया था। उन्होंने कहा कि मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एस ए बोबडे एवं न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन की विशेष पीठ ने हजेला का प्रतिनियुक्ति पर अंतर काडर स्थानांतरण करने का आदेश दिया।

आपको बता दें कि असम एनआरसी की अंतिम सूची 31 अगस्त को जारी की गई थी। इसके लिए आवेदन करने वाले 3,30,27,661 आवेदकों में से 19 लाख से अधिक लोगों को बाहर करते हुए विदेशी घोषित किया गया था। इस वजह से हजेला को इस सूची को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। केन्द्र और असम की भाजपा सरकार ने दावा किया था कि बड़ी संख्या में वास्तविक भारतीय नागरिक इस सूची से छूट गये है और अवैध बांग्लादेशी अप्रवासियों को सूची में शामिल कर लिया गया है। हालांकि इस मामले को हजेला के खिलाफ कुछ प्राथिमकी भी दर्ज की गई थी।