जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी के कथित भड़काऊ बयान का मामला गरमाता जा रहा है। असम पुलिस ने शुक्रवार को इस मामले में पत्रकार व एक्टिविस्ट मंजीत महंता से दो घंटे तक पूछताछ की। यह पूछताछ मदनी के नई दिल्ली में एक मीटिंग के दौरान किए गए कथित भड़काऊ बयानों को लेकर की गई।

आपको बता दें कि दिल्ली एक्शन कमेटी फॉर असम ने दिल्ली में एक सेमिनार का आयोजन किया था। इसमें मदनी ने कथित रूप से भड़काऊ बयान दिए थे। इस मीटिंग में असम के 6 बुद्धिजीवी मौजूद थे। इनमें मंजीत महंता भी शामिल थे। दो घंटे की पूछताछ के बाद पुलिस थाने से बाहर आते ही महंता ने कहा, उनके  व अन्य बुद्धिजीवियों के खिलाफ राजनीतिक साजिश की जा रही है। मदनी विवाद में हम सभी को घसीटा जा रहा है।

महंता ने कहा, पुलिस ने हमारे खिलाफ तो तुरंत कदम उठा लिया लेकिन आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और होजई से विधायक शिलादित्य देब के खिलाफ इस तरह का कोई कदम नहीं उठाया गया जबकि उन्होंने खुले रूप से सांप्रदायिक बयान दिए थे।  महंता ने कहा,मैंने  कुछ भी गलत नहीं किया है। दरअसल जब कार्यक्रम के दौरान मदनी बयान दे रहे थे तब मैंने खुले रूप से इसका विरोध किया था। महंता ने कहा कि न तो वह वह पुलिस से डरते हैं और न ही हिरेन गोहेन।

महंता ने आरोप लगाया कि उनकी पूछताछ के पीछे राजनीतिक षडयंत्र है। इससे राज्य सरकार का फासिस्ट चेहरा उजागर हुआ है जो भाजपा व आरएसएस के खिलाफ बोलने वालों की आवाज को दबाना चाहती है। आपको बता दें कि पुलिस ने गुरुवार को हैदर हुसैन से भी पूछताछ की थी। पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने गुरुवार को कहा, हुसैन जैसे लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई से साफ संदेश मिलता है कि देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता खतरे में हैं। भड़काऊ बयानों को लेकर मौलाना मदनी के खिलाफ अब तक पांच केस दर्ज हो चुके हैं। मदनी के खिलाफ शुक्रवार को दो और एफआईआर दर्ज की गई।

ये एफआईआर नई दिल्ली में एक मीटिंग के दौरान दिए गए कथित सांप्रदायिक बयानों को लेकर दर्ज की गई है। मीटिंग में मौजूद असम के बुद्धिजीवियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है। शुक्रवार को पहली एफआईआर गोलाघाट पुलिस थाने में दर्ज की गई। उजोनी अक्सोम खिलोनजिया मुस्लिम अक्यो मंच के अध्यक्ष मेराज वसिकुर रहमान ने दर्ज कराई। दूसरी एफआईआर देरगांव पुलिस थाने में दर्ज हुई। यह स्थानीय युवक ने दर्ज कराई। रहमान ने कहा कि मदनी ने सांप्रदायिक बयान दिया था।

मदनी ने कथित रूप से कहा था कि एनआरसी के प्रकाशन के बाद अगर 50 लाख मुस्लिमों को इससे बाहर किया गया,तब इसके प्रतिप्रभाव से राज्य जल उठेगा। रहमान ने इस बात पर खेद प्रकट किया कि जब मदनी ने यह बयान दिया तब हिरेन गोहेन, मंजीत महंता,हैदर हुसैन और अपूर्बा बरुआ जैसे बुद्धिजीवी चुप रहे। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ध्रुब ज्योति बोरा ने बताया कि मदनी के खिलाफ आईपीसी की धारा 120(बी), 121, 153, 295(ए) के तहत दर्ज की गई है। गोलाघाट में दर्ज की गई एफआईआर के संबंध में प्राथमिक जांच जारी है।