असम में पंचायत चुनाव के दौरान एक दिलचस्प वाकया सामने आया। यहां एक सीट पर मुकाबला टाई हो गया। दोनों उम्मीदवारों को बराबर-बराबर वोट मिले। मुकाबला टाई होने के कारण हार जीत का फैसला टॉस के जरिए हुआ। शोनई निर्वाचन क्षेत्र के तहत आने वाली ग्रुप मेंबर सीट(शाधीन बाजार ग्राम पंचायत) का फैसला गुरुवार को सिक्का उछालकर किया गया। निर्दलीय उम्मीदवार राजाना बेगम और कांग्रेस उम्मीदवार इदारजान बोरभुईया नंबर 4 ग्रुप मेंबर सीट से चुनाव लड़ा।

दोनों को 125-125 वोट मिले। एक चुनाव अधिकारी ने बताया कि जब दो उम्मीदवारों के बीच टाई हो गया तो हमने सिक्का उछालकर विनर सलेक्ट करने का फैसला किया। टॉस के बाद इदारजान को विजयी घोषित किया गया। आपको बता दें कि पंचायत चुनाव में कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है। भाजपा ने कांग्रेस और एआईयूडीएफ पर भारी बढ़त बना ली है। पंचायत चुनाव की मतगणना अभी भी जारी है।

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रिपुन बोरा जिस विधानसभा सीट से चुनकर आए थे, उसमें भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस अभी तक गोहपुर और सुलेनजिगुड़ी में एक भी सीट नहीं जीत पाई है। कांग्रेस ने 9 वार्ड में से सिर्फ एक सीट पर जीत दर्ज की है। कांग्रेस को 28 पंचायत सीटों में से 27 पर हार मिली है। पंचायत चुनाव में वोटिंग बैलेट पेपर्स से हुई थी। असम में पंचायत बॉडीज में 26 हजार से ज्यादा सीटें हैं।

इनके लिए भाजपा, कांग्रेस, असम गण परिषद, एआईयूडीएफ और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के 78 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा। राज्य में दो चरणों में पंचायत चुनाव हुए थे। दो चरणों में कुल 82 फीसदी मतदान हुआ था। पहले चरण में तिनसुकिया, डिब्रूगढ़, शिवसागर, जोरहाट, माजुली, गोआलघाट, नगांव, धेमाजी, लखिमपुर, बिश्वनाथ, सोनितपुर,दरांग, मोरीगांव,कामरुप(मेट्रो) और कामरुप(ग्रामीण)जिलों में पंचायत चुनाव हुए। दूसरे चरण में 10 जिलों में चुनाव हुए। इनमें नलबाड़ी, बारपेटा, धुबरी, बोंगईगांव, दक्षिण सलमारा-मनकछार, गोलपाड़ा, कछार, हेलाकांडि,करीमगंज और होजई शामिल है।


आपको बता दें कि असम में भाजपा की प्रमुख सहयोगी असम गण परिषद ने अकेले चुनाव लड़ा था। असम गण परिषद सर्वानंद सोनोवाल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में शामिल है। दोनों दलों के बीच विधानसभा चुनाव (2016)से पहले गठबंधन हुआ था लेकिन अब दोनों दलों के रिश्तों में काफी दरार पैदा हो गई है। असम गण परिषद ने नागरिकता (संशोधन) बिल 2016 के विरोध में भाजपा से गठबंधन तोड़ने तक की धमकी दे दी है।