असम NRC के लिए वहां के आदिवासी समुदायों समेत कई लोगों ने आवेदन नहीं किया। इनमें ज्यादातर लोग राज्य के ऊपरी इलाकों में रहने वाले हैं। इन लोगों का मानना है कि उनको अपनी नागरिकता साबित करने की जरूरत नहीं, क्योंकि वो मिट्टी के पुत्र और पुत्री हैं तथा असम में पीढ़ियों से रह रहे हैं। खबर है कि असम के डिब्रूगढ़, तिनसुकिया और शिवसागर जिले में ही लगभग 8000 लोगों ने NRC के लिए आवेदन नहीं किया।

आपको बता दें कि असम के उपरोक्त तीनों जिलों में आदिवासी और स्वदेशी जातियों की आबादी अधिक है। यहां के लोगों का मानना है कि उनका सरनेम ही उनकी पहचान का सबूत है। उनका कहना है कि स्वदेशी जाति के लोगों के नाम अपने आप एनआरसी लिस्ट में शामिल होने चाहिए।

इसके अलावा एनआरसी अधिकारियों का भी मानना है कि इसके लिए आवेदन नहीं करने वाले ऐसे लोगों की संख्या पूरे राज्य में कई हजार तक हो सकती है। उनका कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया वास्तविक नागरिकों और अवैध लोगों को अलग-अलग करने की थी। इसमें कई ऐसे वास्तविक नागरिक भी हैं जो लिस्ट में आने से रह गए।

आपको बात दें कि असम सरकार ने 31 अगस्त को ही राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) की फाइनल लिस्ट जारी की है। इसमें 19 लाख लोगों का नाम नहीं आया जबकि 3,11,21,004 लोग इस लिस्‍ट में अपनी जगह बनाने में सफल हुए