असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी एनआरसी से शुरू हुआ हंगामा अब एक बड़ा मुद्दा बन गया है।बीजेपी इसे लेकर बेहद आक्रामक है। ममता बनर्जी के उस बयान के बाद कि देश में खून की नदियां बह जाएंगी और गृह युद्ध हो जाएगा, बीजेपी ने इस लड़ाई को ममता के गढ़ में ही ले जाने का फैसला किया है।बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह कोलकाता में रैली करेंगे। इसे लेकर पहले राज्य सरकार की ओर से अनुमति न मिलने की खबर आई थी। अमित शाह ने कहा कि चाहे उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए, लेकिन वे रैली जरूर करेंगे। इसके बाद उन्होंने बंगाल बीजेपी के नेताओं से बैठक की और 11 तारीख की रैली और एनआरसी को लेकर रणनीति को अंतिम रूप दिया। बीजेपी ने एनआरसी को लेकर ममता पर हमला भी बोला।

गौरतलब है कि वर्षों के लंबे इंतजार के बाद असम में एनआरसी की अंतिम सूची गत 31 अगस्त को जारी कर दी गयी, जिसमें 19 लाख से अधिक लोगों को जगह नहीं मिली। एनआरसी सूची में शामिल होने के लिए आवेदन करने वाले 3.30 करोड़ से अधिक आवेदकों में से 3.11 करोड़ से अधिक लोगों को अंतिम सूची में जगह मिली। बता दें कि पहला रजिस्टर 1951 में जारी हुआ था। ये रजिस्टर असम का निवासी होने का सर्टिफिकेट है। इस मुद्दे पर असम में कई बड़े और हिंसक आंदोलन हुए हैं। 1947 में बंटवारे के बाद असम के लोगों का पूर्वी पाकिस्तान में आना-जाना जारी रहा। 1979 में असम में घुसपैठियों के खिलाफ ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन ने आंदोलन किया। इसके बाद 1985 को तब की केंद्र में राजीव गांधी सरकार ने असम गण परिषद से समझौता किया। इसके तहत 1971 से पहले जो भी बांग्लादेशी असम में घुसे हैं, उन्हें भारत की नागरिकता दी जाएगी।