असम में एनआरसी की सूची जारी होने के बाद एनआरसी की फाइनल लिस्ट आने के बाद कई लोगों को राहत मिली है तो कई लोगों के सामने संकट आ गया है। दरअसल कामरूप जिले के मलयाबाड़ी गांव में अस्सी फीसदी लोगों का नाम एनआरसी की सूची से बाहर है। बता दें कि एनआरसी की अंतिम सूची 31 अगस्त को जारी कर दी गई। करीब 19 लाख लोगों के नाम लिस्ट में नहीं हैं। एनआरसी की अंतिम सूची से 19,06,677 लोग निकाले गए हैं, जबकि इसी सूची में 3,11,21,004 लोगों को भारतीय नागरिक बताया गया है।

स्थानीय ग्राम पंचायत के तहत यहां दो वॉर्ड आते हैं, जो गुवाहाटी से 100 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित है। ज्यादातर ग्रामीण रोज काम के लिए सोनपुर या गुवाहाटी जाते हैं। 30 वर्षीय बिपुल कर नाराज हैं और असहाय हैं।  बिपुल ने कहा, मेरा नाम सूची में नहीं आया था। मैं यहीं पैदा हुआ और सारे दस्तावेज मेरे पास हैं। मैं एक दैनिक श्रमिक हूं और रोज 300 से 400 कमा लेता हूं। लिस्ट से नाम गायब होने के बाद क्या अब मैं एक भारतीय के रूप में अपनी पहचान साबित करने के लिए काम पर जाऊंगा या कोर्ट जाऊंगा? मैं अपना और परिवार का पेट भरने के लिए कमाता हूं, क्या मुझे न्याय के लिए अपनी कमाई वकील पर खर्च कर देनी चाहिए।

इसी गांव की 59 वर्षीय ममता अन्य ग्रामीणों की तरह बेहद दुखी हैं क्योंकि गांव के 80 फीसदी लोगों को एनआरसी लिस्ट में जगह ही नहीं मिली है। ममता बताती हैं कि फैसला आने के बाद पूरा गांव उदास है।उनका कहना है कि अब ऊपरवाले से प्रार्थना करने के अलावा ग्रामीणों के पास और कोई विकल्प नहीं रह गया है। उन्हें प्रशासन की ओर से पर्याप्त जवाब नहीं मिला है। लोग समझ नहीं पा रहे कि समस्या कहां से आ रही है। लोग उदास और बीमार हो गए हैं। उनकी 8 लोगों की फैमिली में से सिर्फ 1 का ही नाम एनआरसी लिस्ट में आया है। पंचायत कर्मचारी प्रमोद चंद्र कर लगभग एक दशक तक असम सरकार में रहे। उन्होंने कहा, 1964 में जब पूर्वी पाकिस्तान में समस्या थी तब मेरे पूर्वज यहां शरण लेने आए थे। हम असम की संस्कृति और सभ्यता से वाकिब हैं। हम मतदाता हैं और हमारा जन्म भी यहीं हुआ है। मैं एक सरकारी कर्मचारी हूं, फिर भी मेरा नाम नहीं है। पंचायत सदस्यों के परिवार के कई लोगों को लिस्ट से बाहर रखा गया है।