17वीं लोकसभा चुनी जा चुकी है। संसद के इतिहास में बहुत कुछ पहली बार घटित हो रहा है। ऐसा ही एक दृश्य संसद के ऊपरी सदन में देखा गया। जहां असम से राज्यसभा सांसद और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट के नेता बिस्वजीत दैमारी ने बोडो भाषा में अपना सम्बोधन दिया।  20 जून को सांसद भारत के राष्ट्रपति के लिए धन्यवाद संबोधन देने के लिए इक्क्ठे हुए थे। 


उल्लेखनीय है कि राज्य सभा सदस्यों को संविधान की 8वीं अनुसूची में सूचीबद्ध बोडो भाषा सहित 22 भाषाओं में से किसी में भी बात करने की अनुमति है। यह फैसला राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने पिछले साल जून में लिया था।


सांसद ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि बोडो एक समृद्ध भाषा है। बोडो एक ऐसी भाषा है, जिसमें शब्दों का खजाना समाहित है। इस भाषा के माध्यम से आप अपनी भावनाओ को व्यक्त कर सकते है। हालांकि इस भाषा की पहुंच एक सीमित हिस्से तक ही है।

 
बता दें कि दैमारी पहली बार 2008 से 2014 के लिए सांसद चुने गए थे। अब सांसद का दूसरा कार्यकाल चल रहा है। बात की जाए, बोडो भाषा की तो यह देश की पुराणी भाषाओं में से एक है। इस भाषा का नेपाल, बांग्लादेश जैसे देशों में व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है। यह असम की सह-आधिकारिक भाषा है।


अपने संबोधन में दैमारी ने पूर्वोत्तर में उग्रवाद के मुद्दे पर भी प्रकाश डाला और सरकार से उग्रवाद समाप्त करने की दिशा में कदम उठाने के लिए कहा। साथ ही विद्रोही समूहों की हो रही गतिविधियों की रोकथाम के लिए कहा।