बरपेटा स्थित फकरुद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एफीएएएमसीएच) में आज एक और नवजात शिशु की मौत हो गयी। इसके साथ ही यहां मारे गए शिशुओं की संख्या 11 तक पहुंच गयी है इधर, डीएमई के नेतृत्व में गठित जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल के नवजातों की उचित देखभाल हुई थी तथा यह सभी ढांचागत सुविधाओं से लैस है। 

डॉक्टर, नर्स एवं स्टाफों की अपने कर्तव्यों के प्रति कोई कोताही नहीं पायी गयी है। शुक्रवार को यहां डीएमई द्वारा जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि नवजात शिशुओं को एस्फिक्सिया की शिकायत थी इसके साथ ही 8 में से 4 के वजन भी काफी काम थे। रिपोर्ट में यह सलाह भी दी गयी है कि अधिकांश प्रसुतियों को बच्चा जनने से पहले नियमित जांच, समय पर दवा पोषक आहार आदि के विषयों के प्रति जागरूक करने की जरूरत है।  

आपको बता दें की सूत्रों का कहना है कि पिछले एक महीने में बारपेटा मेडिकल कॉलेज में 64 शिशुओं की मौत हुई है। कहा जा रहा है कि बारपेटा मेडिकल कॉलेज आने वाले ज्यादातर मुस्लिम परिवार आर्थिक रूप से बहुत गरीब हैं। ज्यादातर महिलाओं का वजन काफी कम है। प्रेग्नेंसी के दौरान उनका वजन और कम हो जाता है। इस कारण जो बच्चे पैदा होते हैं, उनका वजन भी कम होता है। 11 मौतों को लेकर बारपेटा मेडिकल कॉलेज की ओर कम्पाइल किए गए आंकड़ों से ज्यादातर मामलों में बहुत कम वजन के बच्चों के जन्म की ओर इशारा करते हैं।

 

वहीँ सरमा ने कहा, वे सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट में थे। प्रोपर मेडिकल अटेंशन दिया गया था। दो माताओं की उम्र तो 20 साल से कम है। बारपेटा मेडिकल कॉलेज में पिछले साल की तुलना में इस साल शिशु मृत्यु दर कम है। मेडिकल कॉलेज के प्रभारी प्रिंसिपल दिलीप कुमार दत्ता ने शिशुओं की मौत को सिर्फ संयोग करार दिया है।