असम विधानसभा में विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया ने सोमवार को राज्यसभा में सभी गैर-कांग्रेसी और गैर-भाजपाई सदस्यों से नागरिकता (संशोधन) विधेयक पारित नहीं होने देने की अपील की। उच्च सदन के सदस्यों को लिखे पत्र में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि पूर्वोत्तर के लोग विधेयक के खिलाफ हैं क्योंकि उन्हें डर है कि उनकी भाषा, जमीन, राजनीतिक अधिकार और मूल पहचान छिन जाएगी।


उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में हमें मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और मणिपुर के मुख्यमंत्रियों से सीखना चाहिए जिन्होंने अपने-अपने राज्यों के हित में विधेयक का विरोध किया। पूर्वोत्तर के मूल निवासियों का भविष्य दांव पर है और हमें राजनीति से ऊपर उठकर विधेयक के खिलाफ एकजुट होना चाहिए।


बता दें कि असम विधानसभा में सोमवार को बजट सत्र का पहले दिन जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी पार्टियों ने विवादित नागरिकता बिल को लेकर जमकर नारेबाजी की। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही को 45 मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया। असम गण परिषद (एजीपी) के अध्यक्ष अतुल बोरा ने विवादित नागरिकता (संशोधन) विधेयक का मुद्दा उठाया। कांग्रेस, एआईयूडीएफ के साथ ही एजीपी के विधायकों ने विधेयक को रद्द करने की मांग की।


गौरतलब है कि आठ जनवरी को लोकसभा में पारित हुआ नागरिकता (संशोधन) विधेयक, बांग्लादेश, पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान के गैर-मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान करता है। पूर्वोत्तर में कई संगठनों ने इस विधेयक का यह दावा करते हुए विरोध किया है कि वह क्षेत्र के मूलनिवासियों के अधिकारों को कमतर कर देगा।