ये है असम के जादुमोनी दास, जो 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवाम जिले में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आत्मघाती हमले के चश्मदीद हैं। दास सीआरपीएफ की 43 वीं बटालियान में तैनात हैं। हमले के दिन दास जब अपने डेस्टिनेशनल की ओर बढ़ रहे थे तब वह अपने मोबाइल फोन पर असमिया गाने सुन रहे थे और अपने साथियों से बातचीत कर रहे थे। कुछ ही मिनट के अंदर उनकी दुनिया ही बदल गई क्योंकि उन्होंने अपनी आंखों से आतंकी हमले को देखा था। 

हमले के बाद वहां के मंजर को देखकर दास के रोंगटे खड़े हो गए। दास ने अपने साथियों के क्षत विक्षत शव बिखरे पड़े देखे। चारों ओर खून ही खून फैला हुआ था। आकाश काले धुंए के गुब्बार से आच्छादित हो गया था। दास ने तुरंत अपने घर फोन कर हमले की सूचना दी। उसने अपने मोबाइल फोन पर आत्मघाती हमले का वीडियो भी बनाया। यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेफॉर्म पर वायरल हो गया। जादुमोनि असम के कामरुप जिले की पलासबारी तहसील के जाजि का रहने वाला है। आपको बता दें कि पुलवामा जिले के अवंतिपुरा में जम्मू श्रीनगर हाईवे पर सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ।

इसमें करीब 40 जवान शहीद हो गए। हमलावर ने 300 किलो विस्फोटक से भरी एसयूवी को काफिले में शामिल एक बस से भिड़ा दी थी। काफिले में कुल 78 वाहन थे। इनमें 2500 जवान सवार थे। आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद ने हमले की जिम्मेदारी ली है। आत्मघाती हमलावर ने जिस एसयूवी का इस्तेमाल किया वह महिन्द्रा स्कॉर्पियो गाड़ी थी। वायरल वीडियो में दास कह रहे हैं, बस में कुछ भी नहीं बचा है। चारों ओर शव बिखरे पड़े हैं। पता नहीं क्या हुआ है। सब कुछ उड़ा दिया गया। एक टीवी चैनल से बातचीत में दास ने कहा, भारी बर्फबारी के कारण सभी सडक़ें जाम थी।

14 फरवरी को काफिला अपने डेस्टिनेशन की तरफ बढ़ रहा था। घटना करीब शाम के 4 बजे की है। जब अचानक एक वाहन गलत दिशा से आता हुआ दिखा और वो काफिले में घुस गया। मैं नेक्स्ट व्हिकल में था, शायद वह पांचवा वाहन था। कुछ ही सेकंड के भीतर जोरदार आवाज आई। हमें लगा कि ब्लास्ट हुआ है। ब्लास्ट इतना जोरदार था कि बस के परखच्चे उड़ गए। दो आईईडी ब्लास्ट के बाद सैनिकों व आतंकियों के बीच क्रॉस फायरिंग हुई। आतंकी बचकर भाग निकले। कश्मीर में पहली बार सीआरपीएफ पर हमला हुआ है। फिलहाल हम रिजर्व कैंप में हैं। हम सभी हैरान है।

आपको बता दें कि आतंकी हमले में असम का एक जवान शहीद हुआ है। उसकी पहचान मानेश्वर बासुमातारी के रूप में हुई है। वे बक्सा जिले के कोलबारी गांव के रहने वाले थे। बासुमातारी सीआरपीएफ की 98 बटालियन में बतौर हेड कांस्टेबल तैनात थे। उनकी बेटी ने आतंकी हमले के जिम्मेदार लोगों को मुंहतोड़ जवाब देने की मांग की है। चाहे इसके लिए सीमा पर सर्जिकल स्ट्राइक ही क्यों न करनी पड़े। बासुमातारी अपने पीछे पत्नी सनमाति बासुमातारी व दो बच्चों धनंजय और दिदमासवारी को छोड़ गए हैं। शहीद जवान की बेटी ने कहा, हम न्याय चाहते हैं। मेरे पिता और अन्य जवानों को मारने वालों को दंड मिलना चाहिए। मेरे पिता ने 25 साल देश की सेवा की है। वे 1994 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। ड्यूटी के दौरान उन्होंने अपने प्राण न्योछावर किए। उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए और हमारे जवानों की शहादत का बदला लेना चाहिए।