लोकसभा से पारित नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर इंस्टीट्यूट ऑफ पीस एवं कॉन्फ्लिक्ट स्टडीज (आईपीसीएस) में एक चर्चा आयोजित की गई, जिसमें वक्ताओं ने इसका समर्थन किया। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद् सचिवालय की संयुक्त खुफिया समिति के पूर्व अध्यक्ष अजीत लाल ने कहा कि हिंदू बंगलादेशियों के मुकाबले अवैध रूप से आए मुस्लिम प्रवासियों से असम को ज्यादा खतरा है। राज्य के नौ जिलों में मुस्लिम बहुसंख्यक हो चुके हैं और यदि लगाम नहीं लगायी गयी तो शेष 17 जिलों में भी आने वाले समय में यही स्थिति होगी। 

जनरल डायनामिक्स के पूर्व भारत प्रमुख सुबिमल भट्टाचार्य ने कहा कि इस कानून से बंगलादेश से धर्म के आधार पर भगाये गये लोगों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि बंगलादेश का सिलचर जिला पड़ोसी भारतीय जिलों से ज्यादा समृद्ध है और वहाँ के ज्यादा लोगों के भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने की संभावना कम है। वरिष्ठ पत्रकार नितिन गोखले ने कहा कि यह विधेयक सिर्फ असम के लिए नहीं है और अवैध प्रवासियों का बोझ पूरा देश मिलकर उठायेगा। वरिष्ठ अधिवक्ता डी.पी. सिंह ने कहा कि यह कानून पूरी तरह संवैधानिक है तथा संविधान की धारा 14 का किसी भी तरह उल्लंघन नहीं करता है।