पिछले तीन वित्तीय सालों में असम में 445 बाल विवाह हुए हैं। इन तीन सालों में सर्वाधिक बाल विवाह 2017-18 में हुए हैं। इस वित्तीय वर्ष में 317 बाल विवाह रिकॉर्ड किये गए। कांग्रेस की विधायक रोजलीना तिर्की के एक लिखित सवाल के जवाब में समाज कल्याण मंत्री प्रमिला रानी ब्रह्म ने सदन में यह जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015-16 में 32, वर्ष 2016-17 में 96 और वर्ष 2018-19 में 317 बाल विवाह हुए हैं। 

बाल विवाह रोकने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। राज्य के समाज कल्याण विभाग ने बाल विवाह रोकथाम कानून को लागू करने के लिए इस कानून के अधीन राज्य के बाल विवाह रोकथाम कानून नियम को 2015 में अधिसूचित किया। इसके अलावा राज्य के सभी जिला सुरक्षा अधिकारियों को बाल विवाह रोकथाम अधिकारी के रूप में अतिरिक्त जिम्मेवारी सौंपी गई है।

राज्य के प्रत्येक जिले में शिशु सुरक्षा गुट और शिशु कल्याण समिति को कार्यक्षम किया गया। राज्य शिशु सुरक्षा समिति के अधीन प्रोटेक्शन ऑफिसर (नॉन इंस्टीट्‌यूशनल केयर), प्रोटेक्शन ऑफिसर (इंस्टीट्‌यूशनल केयर) और लीगल कॉम प्रोबेशन ऑफिसर नियुक्त किए गए । साथ ही सजगता का कार्य भी किया गया । बाल विवाह रोकने के लिए चाइल्ड लाइन की निःशुल्क सेवा 1098 फिलहाल 11 जिलों में काम कर रही है । 

ये जिले हैं-कामरूप (मेट्रो), कामरूप, बरपेटा, कछार, डिब्रुगढ़, नगांव, कार्बी आंग्लांग, रेलवे चाइल्ड लाइन, जोरहाट, लखीमपुर और तिनसुकिया । इसके अलावा वर्ष 2018-19 में हैलाकांदी, शिवसागर और बंगाईगांव में इसे शुरू करने के कदम उठाए गए हैं । ज्यादातर बाल विवाह राज्य के चर इलाकों के मुस्लिम समुदाय और चाय जनगोष्ठियों में होते हैं । इन इलाकों में शिक्षा का प्रचार-प्रसार बेहद कम है । असम के शिक्षित समाज में बाल विवाह की घटनाएं देखने को नहीं मिलती ।