असम के वित्तमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा ने कहा कि उनकी सरकार NRC में संशोधन के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट मौजूदा एनआरसी में संशोधन के लिए तैयार नहीं होता है तो वह नई एनआरसी की मांग करेंगे। गौरतलब है कि दिल्ली में रैली के दौरान पीएम मोदी ने कहा था कि कैबिनेट में राष्ट्रव्यापी NRC के लिए कोई चर्चा नहीं हुई। 

हिमंत ने कहा, 'अगर हमें सुप्रीम कोर्ट से न्याय नहीं मिलता है, यानी अगर सुप्रीम कोर्ट कहता है कि वह पहले से जारी एनआरसी से संतुष्ट है तो फिर हमें दूसरे फोरम में इस मुद्दे को बढ़ाना होगा। अगर एनआरसी पूरे देश में लागू होती है तो असम इसमें शामिल होगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो हम नई एनआरसी की मांग करेंगे। फिलहाल हम सैंपल री-वैरिफिकेशन की मांग कर रहे हैं क्योंकि हम लोगों को परेशान नहीं करना चाहते।'

बता दें कि 31 अगस्त को जारी असम की फाइनल एनआरसी से 19 लाख नाम हटा दिए गए थे। नागरिकता संशोधन कानून 2019 के तहत करीब 5 लाख हिंदू-बंगाली जो नागरिकता रजिस्टर से बाहर कर दिए गए, वे रिफ्यूजी के रूप में भारतीय नागरिकता के आवेदन के लिए योग्य होंगे। बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए यह एकमात्र लक्ष्य नहीं है।

हिमंत शर्मा ने कहा, 'एनआरसी में सीमावर्ती जिलों (दक्षिण सल्मारा, धुबरी, करीमगंज और कछार) से 20 फीसदी नामों के समावेशन के लिए हमारा प्रार्थना पत्र सुप्रीम कोर्ट के पास लंबित है। यदि अदालत सहमत हो जाती है तो हम पुन: सत्यापन करेंगे और बड़े पैमाने पर विसंगतियों का पता लगाने की स्थिति में हम नए सिरे से एनआरसी के लिए अदालत का रुख करेंगे। अगर कोई अनियमितता नहीं है तो हम अपने शब्दों को वापस लेंगे और NRC को स्वीकार करेंगे।'

हिमंत शर्मा ने कहा, 'प्रधानमंत्री ने कल कहा था कि राष्ट्रव्यापी एनआरसी की कोई योजना नहीं है। इसलिए हमें सिर्फ सुप्रीम कोर्ट में इस विषय को ले जाना होगा। यदि यह हमारी सुनवाई नहीं करता है तो हम भारत सरकार का रुख करेंगे।' असम में एनआरसी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में प्रकाशित की गई थी। मंत्री ने दावा किया कि असम में डिटेंशन सेंटर का निर्माण गुवाहाटी हाई कोर्ट के आदेश पर किया जा रहा है और केंद्र सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है। 

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