असम सरकार ने एक साथ 116 शिक्षकों को निलंबित कर दिया है। राज्य के शिक्षा मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने यह जानकारी दी। सरमा ने कहा, इन शिक्षकों को बी.एड और डीईआई.एड की परीक्षा में नकल करते हुए पाया गया था। इसके बाद सभी को परीक्षा हॉल से निकाल दिया गया था। सरमा ने कहा निलंबित किए गए शिक्षकों में से 93 प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के तहत रेगुलर टीचर हैं जबकि 73 सर्व शिक्षा अभियान के तहत संविदा शिक्षक हैं। एक बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल के तहत संविदा शिक्षक है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि इन्हें एग्जाम हॉल से निकाल दिया गया था और अब निलंबित किया गया है।

विभाग उनके खिलाफ कार्यवाही शुरु करेगा। शिक्षा मंत्री के संज्ञान में यह विषय कृष्ण कांता हंदिकी स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर हितेष डेका ने लाया था। 12 जुलाई को नियुक्ति पत्र वितरित करने के लिए मीटिंग हुई थी। सरमा ने घोषणा की है कि एग्जाम हॉल से निकाले गए शिक्षकों को निलंबित कर दिया जाएगा। बकौल सरमा, यह शॉकिंग है। जिन शिक्षकों को चीटिंग के कारण एग्जाम हॉल से निकाला गया था उन्हें हटा दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि टीईटी क्वालिफाइड शिक्षकों को भी कदाचार के  लिए बर्खास्त किया गया है। इन शिक्षकों को पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए नियुक्त किया गया था। उधर असम के लोअर प्राइमरी टीचरों ने इस साल शिक्षक दिवस के बहिष्कार का फैसला किया है। नई पेंशन स्कीम को वापस लेने की मांग को लेकर इन्होंने ये फैसला लिया है। असम स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन ने कहा कि सभी प्राइमरी स्कूल के शिक्षक प्रत्येक जिला मुख्यालय में प्रदर्शन करेंगे। ऑल इंडिया प्राइमरी टीचर्स संघ ने इसका आह्वान किया है। एसोसिएशन के महासचिव रतुल चंद्र गोस्वामी ने कहा, 5 सितंबर को हम प्रत्येक जिला मुख्यालय में प्रदर्शन करेंगे। हम शिक्षक दिवस का बहिष्कार कर खुश नहीं है लेकिन कई विरोध प्रदर्शनों के बावजूद राज्य सरकार ने न्यू पेंशन स्कीम को वापस लेने या रिवाइव करने को लेकर कोई कदम नहीं उठाया है।
न्यू पेंशन स्कीम के तहत लोअर प्राइमरी टीचर्स जनरल प्रोविडेंट फंड के लाभ के लिए लाइबल नहीं रहेंगे। पेंशन फंड के लिए शिक्षक को इनकम टैक्स चुकाने के अलावा अपने मासिक वेतन से 10 फसदी हिस्से का योगदान देना होगा। गोस्वामी ने कहा कि नई स्कीम को लागू कर राज्य सरकार पेंशन की जिम्मेदारी प्राइवेट कंपनी को देने जा रही है। राष्ट्र निर्माण में ताजिंदगी योगदान देने के बाद शिक्षक को रिटायरमेंट के बाद भी इनकम टैक्स देना पड़ता है। यह टीचर्स फ्रेटरनिटी का अपमान है। पेंशन के लिए प्रत्येक माह सैलरी से 10 फीसदी की कटौती होगी लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है कि रिटायरमेंट के बाद शिक्षक को कितना अमाउंट मिलेगा। संघ ने जनवरी 2016 से सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग की है।