असम सरकार की 600 करोड़ रुपये की आंशिक कृषि कर्ज माफी योजना की घोषणा के एक दिन बाद प्रदेश के वित्त मंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने स्पष्ट किया कि यह अस्थाई राहत है और राज्य के चार लाख किसानों को इससे लाभ मिलेगा।

असम सरकार के प्रवक्ता और संसदीय कार्य मंत्री चंद्र मोहन पटवारी ने मंगलवार को कहा था कि कैबिनेट ने कल की तारीख तक के सभी कृषि कर्ज के 25 प्रतिशत (25 हजार रुपये तक) की छूट देने को मंजूरी प्रदान कर दी है। पटवारी ने कहा था कि राज्य सरकार को अगले वित्त वर्ष के लिए भी बजटीय प्रावधान करने होंगे।

सरमा ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, यह सब्सिडी योजना है, कृषि कर्ज छूट योजना नहीं है।उन्होंने कहा, इससे करीब चार लाख किसानों को फायदा होगा और करीब 500 करोड़ रुपये की लागत इस पर आएगी।  वहीं असम सरकार ने घोषणा की है कि राज्य के चाय बागानों में काम करने वाले सात लाख से अधिक श्रमिकों के बैंक खातों में ढाई-ढाई हजार रुपये जमा किए जाएंगे। सरकार के मुताबिक, यह राशि उन खातों में जमा कराई जाएगी, जो दो साल पहले नोटबंदी के ठीक बाद खोले गए हैं। 

सरकार ने बजट 2017-18 में ऐसे खातों में प्रोत्साहन के रूप में 5000  रुपये जमा कराने की घोषणा की थी, यह उसकी दूसरी किश्त है। असम के वित्त मंत्री हेमंत विश्व शर्मा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'सरकार ने इस योजना के दूसरे भाग को जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। पहले बार के सभी लाभार्थियों को उनके बैंक खातों में 12 जनवरी 2019 को दूसरे हिस्से की राशि मिल जाएगी।’ असम सरकार ने पहले चरण में 26 जिलों में 752 बागानों के 7,21,485 श्रमिकों के खाते में 2500-2500 रुपये जमा कराए थे। पहले चरण में इस योजना पर 182 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 को उस समय चलन में रहे 1000 और 500 के नोटों को चलन से हटाने की घोषणा की थी।