विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद अब बीजेपी ने भी किसानों को लुभाने की कोशिश की है। दरअसल दो राज्यों में कांग्रेस द्वारा कर्जमाफी के ऐलान के बाद बीजेपी ने इसी राह पर चलने का फैसला किया। ऐसे में लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले ही असम सरकार ने किसानों का कर्ज माफ करने का ऐलान कर दिया है। इस कर्जमाफी का फायदा लगभग आठ लाख किसानों को मिल सकता है, जिससे सरकार पर 600 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। 

इससे पहले मंगलवार को ही बीजेपी के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार ने ग्रामीण इलाकों के बिजली उपभोक्ताओं का बिल माफ करने का ऐलान किया।  असम सरकार के प्रवक्ता और संसदीय मामलों के मंत्री चंद्र मोहन पटवारी ने कहा कि योजना के मुताबिक, सरकार किसानों के लोन का 25 पर्सेंट (अधिकतम 25 हजार रुपये) माफ करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना का लाभ उन किसानों को मिलेगा, जिन्होंने पीएसयू बैंकों और किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से लोन लिया है। 

सोमवार रात को हुई एक कैबिनेट मीटिंग के दौरान असम सरकार ने एक और ब्याज राहत योजना को अप्रूव किया, जिससे 19 लाख किसान अगले साल से जीरो ब्याज दर पर लोन के लिए आवेदन कर सकेंगे। मंत्री ने कहा, 'कर्जमाफी योजना से किसानों के कर्ज का 25 पर्सेंट माफ किया जाएगा। हालांकि, इसकी अधिकतम सीमा 25 हजार रुपये होगी।' इस योजना से राज्य सरकार पर 600 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। मंत्री ने आगे कहा, 'अगले वित्तीय वर्ष में हमें इसके लिए बजट में प्रावधान करना पड़ेगा। किसानों के लिए एक ब्याज राहत योजना भी होगी, जिसके तहत किसानों को चार प्रतिशत ब्याज दर पर लोन दिया जाएगा। इससे किसानों को जीरो ब्याज पर भी लोन मिल सकेगा।' कर्जमाफी के अलावा असम सरकार राज्य में स्वतंत्रता सेनानियों को मिलने वाली पेंशन को 20 हजार से बढ़ाकर 21 हजार रुपये करने की तैयारी में है।