असम सरकार ने सभी समूहों, संगठनों और राजनीतिक दलों से नागरिकता विधेयक के खिलाफ उनके आंदोलन में शांति बरतने और गरिमा बनाए रखने की अपील की। लोकसभा में विधेयक पारित होने के बाद से राज्य में प्रदर्शन हो रहे हैं। किसान मजदूर संग्राम समिति के सदस्यों ने असम सचिवालय के बाहर निर्वस्त्र होकर प्रदर्शन किया। 

मुख्य सचिव आलोक कुमार ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण बनाए रखने की जिम्मेदारी नेताओं की है। उन्होंने कहा कि राज्य एक चुनौतीपूर्ण हालात से गुजर रहा है। हम परिपक्व लोकतंत्र हैं। हमने जनता की आकांक्षाओं और चिंताओं को समझ सकते हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस से संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक पर समर्थन मांगा। तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी ने इससे साफ मना करते हुए मोदी से इस विधेयक को वापस लेने के लिए कहा। पश्चिम बंगाल में दलित मतुआ समुदाय के आवास ठाकुरनगर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत ही एक एकमात्र स्थान है जो सांप्रदायिक हिंसा से खुद को बचाने के लिए पड़ोसी देशों से यहां आए हजारों हिंदू, सिख और अन्य समुदायों के शरणार्थियों को शरण दे सकता है।

उन्होंने कहा कि आजादी के समय देश के बंटवारे के बाद हिंदुओं, सिखों, ईसाइयों और पारसियों को सांप्रदायिक हिंसा के कारण भारत में शरण लेनी पड़ी। उत्तरी 24 परगना जिले में लोगों से भरे मैदान को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा  था कि इन शरणार्थियों को नागरिकता का अधिकार मिलना चाहिए।भारत ही उन्हें शरण दे सकता है। उन्होंने कहा, इसीलिए हमारी सरकार नागरिकता संशोधन विधेयक लाई। मैं तृणमूल कांग्रेस के नेताओं से इस विधेयक का समर्थन करने और शरणार्थी भाइयों एवं बहनों को उनके अधिकार दिलाने में सहायता करने का आग्रह करता हूं। बता दें कि लोकसभा में पारित हो चुका विधेयक अब राज्यसभा में लंबित है.