31 अगस्त को प्रकाशित की गई अंतिम एनआरसी की लिस्ट में 19 लाख लोगों को इस लिस्ट से बाहर रख दिया गया था। जिसके बाद विभिन्न वर्गों की ओर से यह आरोप लगाया गया था कि 31 अगस्त को प्रकाशित अंतिम NRC में बड़ी संख्या में हिंदुओं को बाहर कर दिया गया है।

शीतकालीन सत्र के दौरान किया ऐलान

जिसके बाद अब राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र में असम भाजपा के वरिष्ठ नेता हिमंत बिस्व सरमा ने इसपर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि राज्य सरकार ने अंतिम राष्ट्रीय नागरिक पंजी सूची से बाहर हुए हिंदू बंगालियों का जिलेवार आंकड़ा वर्तमान विधानसभा सत्र में पेश करने का निर्णय लिया है। सरमा ने दावा किया कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने राज्य में तीन वर्ष पहले राष्ट्रीय नागरिक पंजी प्रक्रिया के अद्यतन की प्रक्रिया में ‘‘भारी अनियमितता’’ पाई है।


सार्वजनिक करेंगे आंकड़े

उन्होंने कहा कि, हम बाहर हुए उन हिंदू बंगाली व्यक्तियों के आंकड़े विधानसभा के वर्तमान सत्र के दौरान सार्वजनिक करेंगे जो अपने नाम NRC में शामिल कराने के लिए विभिन्न जिलों में आवेदन कर रहे हैं।

6 दिसम्बर तक चलेगा शीतकालीन सत्र

ज्ञात हो कि राज्य विधानसभा का शीतकालीन सत्र गुरुवार को शुरू हुआ और यह 6 दिसम्बर को समाप्त होगा। सरमा ने कहा, हम पहले यह आंकड़ा नहीं दे सके क्योंकि NRC तैयार नहीं हुआ था। अब हमारे पास जिलेवार आंकड़ा है।


असम में संचालित हुई एनआरसी की प्रक्रिया

ज्ञात हो कि उच्चतम न्यायालय (High Court) की निगरानी वाली अद्यतन प्रक्रिया का उद्देश्य अवैध प्रवासियों की पहचान करना था जिसमें अधिकतर बांग्लादेश से हैं। यह प्रक्रिया असम में संचालित की गई जहां पड़ोसी देश से 20वीं सदी के शुरूआत से ही लोगों का प्रवेश हो रहा है।

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