पूर्वोत्तर भारत को नेशनल ग्रिड से जोड़ने के लिए 750 किलोमीटर की नेचुरल गैस पाइपलाइन बनाने का प्रपोजल है। इससे क्षेत्र में परिवारों और फैक्टरियों की ईंधन की जरूरत को पूरा किया जा सकेगा। मोदी सरकार ने अगले कुछ वर्षों में गैस की अवेलेबिलिटी बढ़ाने और गैस पाइपलाइन नेटवर्क को दोगुना करने की योजना बनाई है और यह पाइपलाइन इसी का हिस्सा है।

असम सरकार की कंपनी असम गैस ने बिहार के बरौनी से बोंगाइगांव तक की इस पाइपलाइन के कंस्ट्रक्शन और इसे ऑपरेट करने के लिए डाउनस्ट्रीम रेगुलेटर, पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (PNGRB) को एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (प्रोजेक्ट में दिलचस्पी) दिया है।

असम गैस ने अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड के साथ कनेक्ट करने के लिए ब्रह्मपुत्र के दोनों किनारों को जोड़ने वाली स्पर लाइंस बनाने का भी प्रपोजल दिया है। एक अन्य स्पर लाइन से मेघालय और बराक वैली के जरिए त्रिपुरा को कनेक्ट करने का प्रपोजल है। PNGRB ने अब कंसल्टेशन का प्रोसेस शुरू कर दिया है और प्रपोज्ड पाइपलाइन पर सभी स्टेकहोल्डर्स से राय मांगी है।

असम गैस ने अपने प्रपोजल में कहा है कि वह जिस क्षेत्र में बिजनेस करती है वहां नेचुरल गैस की डिमांड बहुत अधिक है, लेकिन सप्लाई कम है। कंपनी का कहना है कि असम में कम से कम 13 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर पर डे (mmscmd) की अतिरिक्त डिमांड है। कंपनी अभी अभी लगभग 5.5 mmscmd नेचुरल गैस की सप्लाई करती है।

कंपनी के मुताबिक, 'अगर गैस उपलब्ध कराई जाती है तो डिमांड बढ़ेगी क्योंकि असम सरकार की इंडस्ट्रियल ग्रोथ बढ़ाने की कोशिशों के कारण नए संभावित कंज्यूमर्स प्लांट लगा रहे हैं। पूर्वोत्तर क्षेत्र में गैस की कोई बड़ी नई खोज नहीं हुई है और इस वजह से बाहर से गैस लाना जरूरी है।' असम गैस ने बताया है कि उसके पास रिसोर्सेज जुटाने की क्षमता और जरूरी अनुभव है और असम सरकार उसे इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में मदद करेगी। प्रपोज्ड पाइपलाइन की कैपेसिटी 15 mmscmd की होगी और यह गेल की ओर से बनाई जा रही जगदीशपुर-हल्दिया पाइपलाइन से बरौनी में गैस हासिल करेगी।

सरकारी कंपनी गेल उत्तर प्रदेश में जगदीशपुर से पश्चिम बंगाल में हल्दिया, झारखंड में बोकारो और ओडिशा में धामरा तक 2,620 किलोमीटर की गैस पाइपलाइन बना रही है। इस पाइपलाइन के पास 16 mmscmd गैस को ट्रांसपोर्ट करने की क्षमता होगी। इसके लिए गैस दाहेज, दाभोल और धामरा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इम्पोर्ट टर्मिनल्स और मध्य प्रदेश में रिलायंस इंडस्ट्रीज की कोल बेड मिथेन फील्ड से प्राप्त होने की संभावना है। असम गैस, गेल और अन्य कंपनियों की प्रपोज्ड पाइपलाइंस से देश में गैस पाइपलाइन नेटवर्क में काफी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। सरकार अगले कुछ वर्षों में गैस पाइपलाइन नेटवर्क दोगुना कर 30,000 किलोमीटर तक पहुंचाना चाहती है।