असम के 60 संगठनों ने प्रस्तावित नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ 12 घंटे के असम बंद का आह्वान किया था। इस दौरान बंद का पूरा प्रभाव रहा। वहीं भाजपा गठबंधन में सहयोगी असम गण परिषद ने इस प्रस्तावित विधेयक के खिलाफ गुवाहाटी विशाल जुलूस निकाला और धमकी दी कि विधेयक पारित हुआ, तो पार्टी सरकार में नहीं रहेगी।

भाजपा गठबंधन सरकार ने बंद को विफल करने के लिए अनेक कदम उठाए थे। व्यापारियों को ट्रेड लाइसेंस रद्द करने की धमकी दी गई। कर्मचारियों को अनुपस्थित रहने पर वेतन काटने और अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी दी गई। यहां तक कि बंद को विफल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश का डर दिखाया गया। इन सबको अनदेखी करते हुए राज्य में संपूर्ण बंद हुआ। अनेक स्थान पर रेल रोकी गई। बसों को नुकसान पहुंचाया गया। सड़कों पर टायर जलाकर विरोध किया गया।

बंद के मुख्य आयोजक कृषक मुक्ति संग्राम समिति के सलाहकार अखिल गोगोई ने कहा कि हमने भी नहीं सोचा था कि बंद इतना सफल होगा। बंद के सफल होने से यह बात साफ हो गई कि राज्य के सभी लोग विवादित प्रस्तावित विधेयक के खिलाफ है। अगप के अध्यक्ष तथा सरकार में मंत्री अतुल बोरा ने कहा कि इस विधेयक को पारित करने से राज्य में जो स्थिति उत्पन्न होगी उसके लिए केंद्र सरकार पूरी तरह जिम्मेदार होगी। केंद्र को यह स्पष्ट करना होगा कि वह असम को विदेशियों का बनाना चाहती है या स्वदेशियों का।

बोरा ने आगे कहा कि असम समझौते को मानना है, तो इस विवादित विधेयक को डस्टबिन में फेंकना होगा। असम समझौता हमारे लिए कुरान, गीता और बाइबल की तरह पवित्र है। स्वदेशियों के अधिकारों को हनन करने नहीं दिया जाएगा। प्रस्तावित विधेयक के पक्ष में जो हैं और असम समझौते के खिलाफ हैं उन्हें उखाड़ फेंकने की जरुरत है। असम में जिस तरह प्रस्तावित विधेयक के खिलाफ माहौल बना है वह भाजपा के लिए लोकसभा चुनाव में नुकसानदायक साबित हो सकता है।