राज्य के आधे से ज्यादा जिले अभी भी बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे हैं। 21 लाख 68 हजार 134 लोग या तो अपने घरों से बेघर हो चुके हैं अथवा फिर बाढ़ राहत व अन्य जनसुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। शासन पिछले सप्ताह से अधिक समय से दावे तो बहुत कर रहा है, लेकिन बाढग्रस्त इलाकों की दुर्दशा चीख-चीख कर सच्चाई बयां कर रही है। सबसे प्रभावित बरपेटा जिले में बीते 24 घंटे में एक व्यक्ति की और मौत हो गई है। निचले असम के ज्यादातर जिले बीते 16 दिनों में आने-जाने के रास्तों, शुद्ध पीने के पानी और खाद्य सामग्रियों के अभाव से बुरी तरह जूझ रहे हैं।


दवाइयों का अभाव
जिन इलाकों में बाढ़ का पानी सिमटा है या सिमट रहा है, वहां मलेरिया और अन्य जलजमाव से पैदा होने वाली बिमारियों ने डेरा डाल लिया है। बाढ़ के पानी में डूब कर सड़ चुकी खाद्य सामग्रियों और मरे जानवरों की सड़ांध अंदरूनी गावों में बीमारियों को खुला आमंत्रण दे रही है। गांवों में दवाओं का घोर अभाव है।


खतरे के निशान से ऊपर
असम आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट में 18 जिले, 56 राजस्व क्षेत्र और 1716 गांव प्रभावित बताए गए हैं। राज्य के अन्य इलाकों में जहां बाढ़ सिमटी है, जोरहाट के निमातीघाट और धुबड़ी, शिवसागर के नांगामराघाट में दिसांग, शोणितपुर के एनटी रोड जिंग में जिया भराली, कामरूप के एनएच रोड जिंग में पुथीमारी, बरपेटा में कुशियारा नदियां अभी भी खरते के निशान से नीचे आने को तैयार नहीं दिख रहीं।