असम में CAA से आस लगाए 104 साल के 'विदेशी' बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया और उनकी इच्छा भारतीय नागरिक बनने की थी। 104 साल के चंद्रधर दास का रविवार को दिल की बीमारी के बाद निधन हो गया। दो साल पहले उन्हें विदेशियों के लिए बनाए गए डिटेंशन कैंप में रखा गया था, जहां उन्होंने तीन महीने बिताए थे। इसके बाद उन्हें बेल मिल गई थी। बीते दिनों डिमेंशिया और दिल की बीमारी से जूझते दास ने 'विदेशी' के रूप में ही दम तोड़ दिया।

दास की बेटी न्युति वह दिन याद करती हैं जब उनके भाई के फोन पर चंद्रधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण सुन रहे थे। पीएम को सुनकर उनके पिता मुस्कुराकर बोले, 'मोदी आमारा भगवान (मोदी हमारा भगवान है)। वह यहां नागरिकता कानून से सबका समाधान निकालेगा। हम सब भारतीय हो जाएंगे।' न्युति ने बताया कि उनके पिता को हमेशा यही उम्मीद रही कि एक दिन उन्हें भारतीय नागरिकता मिल जाएगी। वह जहां भी मोदी के पोस्टर देखते, हाथ जोड़कर नमस्कार करते और सिर झुकाते।

पीएम मोदी से उन्हें बड़ी उम्मीद थी। कानून को बने एक साल हो गए लेकिन उनके 'भगवान' ने क्या किया? वह सिर्फ भारतीय होकर मरना चाहते थे। हमने बहुत कोशिश की। कोर्ट-कोर्ट में भटके। वकीलों से लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं तक से मिले, सभी पेपर्स जमा किए। और फिर वह (चंद्रधर) चले गए। अभी भी उनका परिवार कानून की नजर में विदेशी हैं।