असम कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा ने इस साल के अंत में पांच विधानसभा सीटों पर होने वाला उपचुनाव संयुक्त रूप से लड़ने की संभावना तलाशने के लिये रायजोर दल के प्रमुख अखिल गोगोई से मुलाकात की है। हालांकि, सोमवार देर रात को शिवसागर में हुई चर्चा बेनतीजा रही और दोनों पक्षों ने आने वाले दिनों में चर्चा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। बोरा ने संवाददाताओं से कहा, यह सिर्फ एक शिष्टाचार मुलाकात थी क्योंकि मैं अपनी पार्टी की बैठक के लिए उनके (गोगोई के) निर्वाचन क्षेत्र में हूं। हम दोनों भाजपा की विभाजनकारी नीतियों के खिलाफ हैं।

हमने चर्चा की कि हम भविष्य में भगवा खेमे से कैसे लड़ेंगे। उन्होंने राज्य सरकार के जनविरोधी फैसलों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए विधानसभा में कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने के लिए शिवसागर के निर्दलीय विधायक गोगोई की सराहना की। बोरा ने बिना विस्तार से कहा, हमने पहले भी भाजपा के खिलाफ एकजुट होने की कोशिश की थी और हम भविष्य में फिर से कोशिश करेंगे। दूसरी ओर, गोगोई ने कहा कि भाजपा विरोधी दोनों दलों को छोटी अवधि के बजाय लंबे समय के लिए एकजुट होना चाहिए। उन्होंने कहा, हमने चर्चा की कि 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को कैसे हराया जाए और 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद असम में सरकार कैसे बनाई जाए। हमने उपचुनावों के बारे में विकल्पों का भी मूल्यांकन किया, लेकिन अभी तक कुछ भी तय नहीं किया गया है। दोनों पार्टियों के शीर्ष नेताओं के बीच यह दूसरे दौर की बैठक थी।

आठ अगस्त को, कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राणा गोस्वामी और जाकिर हुसैन सिकदर ने गुवाहाटी में रायजोर दल के मुख्यालय पहुंच गोगोई और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की थी। इस साल की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को 126 सदस्यीय विधानसभा में 60 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। उसके सहयोगी दलों असम गण परिषद ने नौ और यूपीपीएल ने छह सीटें जीती थीं। विपक्षी खेमे में, कांग्रेस को 29 और एआईयूडीएफ को 16 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। बीपीएफ ने चार और माकपा ने एक सीट जीती थी। रायजोर दल के गोगोई ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की थी। विधानसभा की पांच सीटों पर उपचुनाव होना है। इनमें से एक-एक सीट पर यूपीपीएल, बीपीएफ विधायक का निधन हो गया है। कांग्रेस के दो विधायकों के भाजपा में शामिल होने से दो सीटें खाली हुई हैं। वहीं, असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल केन्द्रीय मंत्री बन चुके हैं। लिहाजा उनकी छोड़ी हुई सीट पर भी उपचुनाव होना है।