असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल, उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी हिमंत बिस्वा सरमा, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रिपुन बोरा ने पूर्व मंत्री और 1985 में असम समझौते पर हस्ताक्षर करने वालों में शामिल रहे बिराज सरमा के निधन पर दुख जताया।

सोनोवाल ने एक बयान में बताया कि उन्होंने राज्य प्रशासन को सरमा का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ करने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिराज सरमा का निधन राज्य के राजनीतिक क्षेत्र के लिए बड़ा नुकसान है। अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने राज्य के सार्वजनिक जीवन में बहुत योगदान दिया।

1985 में असम समझौते पर हस्ताक्षर करने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान था। उनका निधन राज्य के सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक जीवन के लिए एक बड़ी क्षति है। बोरा ने सरमा को असम आंदोलन का एक अग्रिम पंक्ति का नेता बताया।

सरमा का सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात को करीब ढाई बजे एक अस्पताल में निधन हो गया। वह काफी लंबे वक्त से बीमार थे और उन्हें जनवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

बता दें कि वे ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू) के नेतृत्व में 1979 में शुरू किए गए असम आंदोलन के अग्रिम पंक्ति के नेता थे। यह आंदोलन छह बरस तक चला था और 1985 में एएएसयू और केंद्र तथा असम सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा असम समझौते के ‘मेमोरेंडम ऑफ सेटलमेंट’ पर हस्ताक्षर होने के साथ खत्म हुआ था। सरमा ने असम आंदोलन में ‘सदो असम गण संग्राम परिषद’ के सक्रिय सदस्य के तौर पर हिस्सा लिया था।

वह एजीपी के सह संस्थापक थे। वह इस पार्टी के महासचिव और उपाध्यक्ष रहे। एजीपी का गठन 1985 में असम आंदोलन के नेताओं ने किया था। सरमा अपने निधन तक एजीपी के साथ रहे। वह गौहाटी पूर्वी विधानसभा सीट से दो बार विधायक भी रहे। पार्टी सूत्रों ने बताया कि सरमा एजीपी नीत सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान 1996 से 2001 तक नगर प्रशासन मंत्री रहे थे। उन पर 1998 में प्रतिबंधित संगठन उल्फा ने हमला भी किया था। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रंजीत दास ने उनके निधन पर दुख जताया है।