भाजपा शासित राज्य असम में भारत की नागरिकता पाने के लिए सरकार ने बहुत ही छोटी समय सीमा रखने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत असम सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से आग्रह किया है कि राज्य में नागरिकता (संशोधन) कानून के तहत सीमित समयावधि के लिए आवेदन का मौका दिया जाए। यह समयसीमा 3 महीने तक की हो सकती है। भाजपा के मुताबिक समयसीमा के अंतर्गत आवेदन का प्रावधान असम में रह रहे बांग्लादेश के अल्पसंख्यक समुदाय के 3 लाख लोगों के लिए सीएए के तहत नागरिकता पाने की दृष्टि से पर्याप्त होगा। सीएए के नियम अगले कुछ दिनों में ही नोटिफाइ होने वाले हैं। 

असम भाजपा के सूत्रों के अनुसार असम में शरणार्थियों के लिए समयबद्ध आवेदन प्रक्रिया के लिहाज से सीएए के नियम बनाने का सुझाव दिया गया है। दूसरे राज्यों में नागरिकता के लिए आवेदन की लंबी अवधि दी जा सकती है, लेकिन असम के लिए कम समयसीमा रखने का आग्रह किया है ताकि 2014 से पहले भारत आए सिर्फ सच्चे शरणार्थी ही नागिरकता पा सकें। इसमें यह भी आग्रह किया है कि शरणार्थियों से नागरिकता आवेदन के वक्त भी वही दस्तावेज मांगे जाएं जो उन्होंने एनआरसी लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए दिए थे। अनुमान है कि जिन्होंने एनआरसी लिस्ट में नाम शामिल करने का आवेदन नहीं किया था, वे 2014 के पहले से असम में नहीं रह रहे हैं।'

माना जा रहा है कि असम एनआरसी लिस्ट से करीब पांच लाख हिंदू बाहर रह गए। हालांकि, सीएए के तहत नागिरकता के लिए आवेदन करने वालों की संख्या इससे बहुत कम होगी। एक सूत्र ने कहा, 'इसका कारण यह है कि एनआरसी लिस्ट से बाहर रहे कई लोग इस लिस्ट में जगह बनाने वालों के रिश्तेदार हैं। वे फॉरनर्स ट्राइब्यूनल में अपील कर अपना नाम एनआरसी में जुड़वाने की कोशिश में हैं। अनुमान है कि असम में रहने वाले बांग्लादेशी हिंदू जो सीएए के अंतर्गत नागरिकता मांग सकते हैं, उनकी संख्या तीन लाख से ज्यादा नहीं होगी।'


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