राज्य में भाजपा की सहयोगी असम गण परिषद बांग्लादेशी हिंदुओं को भारतीय नागरिकता के खिलाफ है। असम गण परिषद ने दोहराया है कि पार्टी को बांग्लादेशी हिंदुओं को भारतीय नागरिकता प्रदान करना स्वीकार्य नहीं है। बूथ स्तर के पार्टी कार्यकर्ताओं की रैली को संबोधित करते हुए असम गण परिषद के अध्यक्ष और कृषि मंत्री अतुल बोरा ने कहा कि हम मंत्री हो सकते हैं, लेकिन हमें गठबंधन से बाहर आने में एक सैकेंड नहीं लगेगा। हमारे लिए असम के हित सर्वोपरि हैं, चाहें हम सत्ता में रहें या ना रहें। 

बोरा ने कहा कि बांग्लादेशी हिंदुओं को भारतीय नागरिकता प्रदान करना हमें स्वीकार्य नहीं है। आपको बता दें कि केंद्र सरकार नागरिकता अधिनियम संशोधन की कोशिश कर रही है। इस संशोधन के बाद अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता मिल जाएगी। असम गण परिषद नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 के खिलाफ है कहा जा रहा है कि नागरिकता संशोधन विधेयक (2016) पारित होने के बाद बिना वैध दस्तावेजों के बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाईयों को भारतीय नागरिकता मिल जाएगी। असम में अगले साल पंचायत चुनाव होने हैं। असम गण परिषद ने अकेले चुनाव लडऩे का फैसला किया है। 

असम गण परिषद सर्वानंद सोनोवाल के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार का हिस्सा है। भाजपा ने 2016 चुनाव में असम गण परिषद के साथ मिलकर लड़ा था, लेकि पंचायत चुनाव दोनों पार्टियां अलग-अलग लड़ेंगी। बोरा ने पार्टी कार्यकर्ताओं से असम गण परिषद को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए कहा है। एजीपी अध्यक्ष ने पार्टी कार्यकर्ताओं को लोगों के साथ खडा रहने को कहा जैसा कि पार्टी ने हमेशा किया है। बोरा ने कहा कि आगे बढ़ो और प्रत्येक चुनाव में जीत का झंडा लहराओ। असम के पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार महंता ने कहा कि असम में सिर्फ असम गण परिषद ही जाति, माटी, भेती के हितों की रक्षा कर सकती है।