संसद के शीतकालीन सत्र में नागरिकता (संशोधन) बिल, 2016 को मंजूरी देने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव के विरोध में करीब 46 संगठनों ने 12 घंटों के लिए असम बंद का ऐलान किया है। बंद का ऐलान कृषक मुक्ति संग्राम समिति (KMSS) और असम जतियातावादी युवा छात्र परिषद (AJYCP) द्वारा किया गया।


इस बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों ने राज्य भर में रेलवे पटरियों पर अवरोधक लगाने और ट्रेन परिचालन को बाधित करने की कोशिश की। पुलिस अधिकारियों ने यहां बताया कि ट्रेन के परिचालन को बाधित करने की कोशिश कर रहे लोगों को वहां से हटा दिया गया है। प्रदर्शनकारियों ने राज्य के विभिन्न स्थानों पर सड़कों पर टायर जलाए। 

सार्वजनिक परिवहन की गाड़ियों को पुलिस की सुरक्षा दी गई है ताकि बंद के दौरान यातायात सुविधा सामान्य रह सके। राजनीतिक पार्टियां कांग्रेस और एआईयूडीएफ ने बंद को अपना समर्थन दिया है। राज्य की बीजेपी सरकार ने सभी जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षकों से बंद के दौरान सार्वजनिक उपयोग की सेवाओं की बहाली सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। संबंधित जिला उपायुक्तों ने सभी सरकारी अधिकारियों को निर्देश जारी किया है कि वह अपनी ड्यूटी में मौजूद रहें। आदेश में यह भी कहा गया कि बंद के दौरान दुकानें, कारोबारी प्रतिष्ठान, शैक्षणिक संस्थान खुले रहने चाहिए और सार्वजनिक यातायात सुविधा भी सामन्य तरीके से काम करे। 

कांग्रेस के साथ-साथ कई राजनीतिक पार्टियों ने बंद का समर्थन किया है। गृह मंत्रालय के साथ संयुक्त संसदीय समिति की आज होने वाली बैठक के विरोध के लिए भी प्रदर्शन किया जा रहा है। जेपीसी के अध्यक्ष बीजेपी एमपी राजेंद्र अग्रवाल ने इसी साल मई में असम का दौरा किया था। नागरिकता एक्ट 1955 में संशोधन के लिए नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा में पेश किया गया ताकि 31 दिसंबर 2014 से पहले अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से भारत आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान किया जा सके। असम का कई संगठनों ने इस बिल का विरोध किया।

बंद को देखते हुए असम की बीजेपी सरकार ने राज्य में शांति बनाए रखने के लिए पहले ही पूरी तैयारी कर ली थी। इसके लिए अमस में मुख्यमंत्री सरबानंद सोनोवाल ने सीनियर मंत्रियों और बीजेपी नेताओं के साथ बैठक की थी। इसी बीच प्रदेश के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के ऑर्डर का हवाला देते हुए कहा कि बंद अवैध है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने बंद को अवैध घोषित किया है, इसलिए हमें कोर्ट के फैसला का पालन करना चाहिए। बंद कराने वाले लोगों को क्षति का भुगतान करना पडे़गा।