अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी ने एक लंबा चौड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने काबुल छोड़ने को अपनी जिंदगी का ‘सबसे मुश्किल फैसला’ बताया। गनी ने ट्विटर पर बयान पोस्ट करते हुए खेद व्यक्त किया कि उनका ‘अपना चैप्टर’ उनके पूर्ववर्तियों की तरह ही त्रासदी के साथ समाप्त हो गया और उन्हें अफगानिस्तान में स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित किए बिना काबुल छोड़ना पड़ा। 

इस साल 15 अगस्त को तालिबान ने काबुल में प्रवेश कर अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था और इसी दिन अशरफ गनी सहित अन्य टॉप मंत्री देश छोड़कर भाग गए थे। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, मुझे गहरा अफसोस है कि मेरा चैप्टर मेरे पूर्ववर्तियों के समान त्रासदी के साथ समाप्त हुआ है, वो भी स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित किए बिना। मैं अफगान लोगों से माफी मांगता हूं कि मैं इसे अलग तरीके से खत्म नहीं कर सका। अफगान लोगों के प्रति मेरी प्रतिबद्धता कभी डगमगाई नहीं और यही जीवनभर मेरा मार्गदर्शन करती रहेगी।

वहीं गनी ने एक बार फिर खजाने से लाखों की चोरी से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि वह लेखा परीक्षा या वित्तीय जांच के लिए तैयार हैं। गनी ने कहा, मेरी पत्नी और मैं अपने व्यक्तिगत वित्त में ईमानदार रहे हैं। मैंने सार्वजनिक रूप से अपनी सारी संपत्ति घोषित कर दी है। मेरी पत्नी की पारिवारिक विरासत का भी खुलासा किया गया है और अपने गृह देश लेबनान में सूचीबद्ध है। मेरे बयानों की सत्यता को साबित करने के लिए मैं संयुक्त राष्ट्र के तहत या किसी अन्य उपयुक्त स्वतंत्र निकाय के तत्वावधान में लेखा परीक्षा या वित्तीय जांच का स्वागत करता हूं।

रिपोर्ट में कहा गया है, अपने बयान में गनी ने कहा कि वह महल की सुरक्षा के लिए सड़क पर खूनी लड़ाई के जोखिम से बचने के लिए देश से चले गए। एक बयान के अनुसार, गनी ने माफी मांगते हुए कहा कि उन्हें ‘यह कैसे समाप्त हुआ’ के लिए खेद है। गनी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किए गए एक लंबे बयान में कहा, काबुल छोड़नाड मेरी जिंदगी का सबसे मुश्किल फैसला था, लेकिन मेरा मानना था कि बंदूकों को चुप रखने और काबुल और उसके 60 लाख नागरिकों को बचाने का यही एकमात्र तरीका था। मैंने अपने जीवन के 20 साल अफगान लोगों को निर्माण की दिशा में काम करने में मदद करने के लिए समर्पित किए हैं। एक लोकतांत्रिक, समृद्ध और संप्रभु राज्य - उस दृष्टि के लोगों को छोड़ने का मेरा इरादा कभी नहीं था।