त्रिपुरा के विधानसभा चुनाव में इस बार सभी की नजरें उन 6 सीटों पर है जहां से तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए नेता चुनाव लड़ रहे हैं। पिछले साल अगस्त में तृणमूल कांग्रेस के 6 विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे। इनमें प्रमुख नाम है आशीष कुमार साहा का,जो फिर टाउन बोरदोवली से चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार वे भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव में साहा ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। उनका मुकाबला था एआईएफबी के श्यामल रॉय से। साहा ने रॉय को 7060 वोटों से हराया था। साहा को 22, 474 वोट मिले थे जबकि रॉय को 15,414। टाउन बोरदोवली सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा है। यहां से 6 बार कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं जबकि दो बार एफबीएल के। यहां सबसे ज्यादा वोटों से जीतने वाले नेता आशीष कुमार साहा ही हैं।

सबसे कम वोटों से जीतने वाले नेता हैं कांग्रेस के अशोक कुमार भट्टाचार्य जिन्होंने 1983 के विधानसभा चुनाव में एफबीएल के ब्राजा गोपाल रॉय को सिर्फ 1,140 वोटों से हराया था। अशोक कुमार को 7,689 वोट मिले थे जबकि रॉय को 6,549 मत मिले थे। कांग्रेस के अशोक कुमार भट्टाचार्य इस सीट से तीन बार और सुधीर रंजन मजूमदार दो बार विधायक रहे हैं। एफबीएल के ब्राजो गोपाल रॉय 6 बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन जीते सिर्फ दो बार। 1977 के विधानसभा चुनाव में एफबीएल के ब्राजा गोपाल रॉय ने जेएनपी के द्विजेन डे को 5,766 वोटों से हराया था। रॉय को 7,800 वोट मिले थे जबकि डे को 2034 वोट मिले थे। साहा के बाद रॉय सबसे ज्यादा मतों से जीतने वाले नेता रहे हैं। 1983 के विधानसभा चुनाव में अशोक कुमार भट्टाचार्य को चुनाव मैदान में उतारा। उन्होंने एफबीएल के ब्राजा गोपाल रॉय को 1,140 वोटों से हराया था। भट्टाचार्य को 7,689 वोट मिले थे जोकि रे को 6549।

1988 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उम्मीदवार बदल दिया। इस बार पार्टी ने सुधीर रंजन मजूमदार पर दांव लगाया। उन्होंने ब्राजा गोपाल रॉय को 2,677 वोटों से हराया। मजूमदार को 10,308 वोट मिले जबकि रॉय को 7,631। 1993 के विधानसभा चुनाव में ब्राजा गोपाल रॉय ने वापसी की और कांग्रेस की पूर्णिमा भट्टाचारजी को 1,254 वोटों से हराया था। रॉय को 10,658 वोट मिले थे जबकि पूर्णिमा को 9,404 मत पड़े। 1998 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने फिर अशोक कुमार भट्टाचार्य को पार्टी का उम्मीदवार बनाया। उन्होंने फिर एफबीएल के ब्राजा गोपाल रॉय को 3,692 वोटों से हराया।


भट्टाचार्य को कुल 11,357 वोट मिले जबकि रॉय को 7,665। 2003 के विधानसभा चुनाव में फिर कांग्रेस के अशोक कुमार भट्टाचार्य ने यह सीट हथियाल ली। उन्होंने ब्राजा गोपाल रॉय को 2,166 वोटों से हराया। भट्टाचार्य को 12,010 वोट पड़े जबकि रॉय को 9,884। 2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने फिर उम्मीदवार बदल दिया। पार्टी ने फिर सुधीर रंजन मजूमदार पर दांव लगाया। उन्होंने सीपीएम के डॉ सुधीर चंद्र मजूमदार को 3,225 वोटों से हराया। कांग्रेस के उम्मीदवार को कुल वोट मिले 14,190 जबकि सीपीएम के प्रत्याशी को मिले 10,965।