राज्यों को ओबीसी आरक्षण की सूची तैयार करने का अधिकार देने वाले बिल पर असुद्दीन ओवैसी ने सरकार का समर्थन किया है, लेकिन तंज भी कसा है। ओवैसी ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार इस बिल को जिस तरह से लाई है, वह शाहबानो की याद दिला देता है। अब मैं उम्मीद करता हूं कि बार-बार शाहबानो का जिक्र नहीं किया जाएगा। 

एआईएमआईएम के नेता ने कहा कि संविधान सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कानून बनाने का अधिकार संसद को देता है। इसलिए यह आपका अधिकार है, लेकिन मैं अब मानता हूं कि शाहबानो का नाम बार-बार नहीं लिया जाएगा। ओवैसी ने कहा कि बड़ी-बड़ी बातें हुई हैं कि यह सरकार ओबीसी के लिए है। लेकिन मैं सरकार को एक्सपोज करता हूं।

ओवैसी ने कहा कि रोहिणी कमिशन की रिपोर्ट है कि 10 फीसदी ओबीसी को 50 फीसदी मिल रहा है और दूसरी 20 फीसदी बिरादरियों को कुछ नहीं मिल रहा है। मेरी मांग है कि इस लिस्ट में जातियों को सब-कैटिगराइज भी किया जाए। एक बात और है कि यदि किसी राज्य में किसी बिरादरी को ओबीसी का दर्जा मिलता है तो फिर उसे केंद्र में भी जगह मिलनी चाहिए। इसके अलावा ओवैसी ने 50 फीसदी आरक्षण की सीमा को भी खत्म करने की मांग की। केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए ओवैसी ने कहा कि आखिर प्यार किया तो डरना क्या। एक तरफ देश में 20 फीसदी लोगों के लिए 50 पर्सेंट सीटें हैं तो वहीं 50 फीसदी लोगों के लिए 47% ही सीटें हैं।

आपकी मोहब्बत ओबीसी से नहीं है, उनके वोट से है। आपका दिल उन 20 फीसदी लोगों के लिए धड़कता है, जिनके लिए आपने 50 की लिमिट तय कर रखी है। हमारा कहना है कि सरकार को इस लिमिट को तोड़ना चाहिए। यह सुनहरा मौका है कि आप कानून बनाएं और 50 फीसदी की लिमिट को तोड़ते हुए ओबीसी को न्याय दें।  

इसके अलावा ओवैसी ने दलित, पिछड़े मुसलमानों और ईसाइयों को भी आरक्षण दिए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि 1950 में जो कानून बना था, वह रिलीजन न्यूट्रल नहीं था। उन्होंने कहा कि मैंने कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के भाषणों को सुना। वे लोग मराठा की बात कर रहे हैं, लेकिन मुसलमानों की बात नहीं की गई है। क्या आपके दिल में मुसलमानों के लिए कोई जगह नहीं है। ओवैसी ने कहा कि जिस मराठा समुदाय को आरक्षण के लिए यह बिल लाया गया है, उसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने ही कहा था कि मराठा गरीब नहीं दिखते हैं। आखिर आप उन्हें कैसे गरीब दिखाएंगे।