दरंग जिला सहित गुवाहाटी महानगर और राज्य के अन्य भागों में डकैती कांड का आरोपी और वर्षों से असम पुलिस का सिरदर्द बना आसाबाबू इस्लाम को आखिरकार दरंग जिले के खारुपेटिया और धुला थाने की पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर पकड़ने में सफलता प्राप्त की। राज्य के वरिष्ठ अधिवक्ता और मंगलदै निवासी बिनय घोष की हत्या और उसके घर डकैती और हत्या के मामले दर्ज हैं। दक्षिण भारत के कर्नाटक पुलिस ने भी एक बार डकैती के आरोप में आसाबाबू और उनके साथियों को गिरफ्तार कर कर्नाटक की जेल में बंद कर रखा था। इधर गुवाहाटी महानगर सहित राज्य के अन्य भागों में लगातार हो रही डकैती को लेकर राज्य के विभिन्न थानों की पुलिस आरोपी आसाबाबू को पकड़ने के लिए लगातार खारुपेटिया स्थित बिहूदिया गांव में असफल छापेमारी कर रही थी।

इधर लगातार हो रही डकैती और उसमें आसाबाबू का नाम आने से दरंग पुलिस
विशेषकर खारुपेटिया पुलिस पर बहुत दबाव था। इसी दबाव को लेकर जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उज्जवल बरुवा के नेतृत्व में खारुपेटिया थाना प्रभारी बिराज मोहन डेका और धूला थाना प्रभारी अभिजीत काकती को लेकर बनी एक संयुक्त टीम को 24 घंटे अलर्ट पर रखते हुए मुखबिरों का जाल बिछा दिया। इन्हीं मुखबिरों के इनपुट के आधार पर संयुक्त टीम ने गत रात धूला थाना क्षेत्र के कियोट सूबा में एक घर में छिपे कुख्यात डकैत आसाबाबू को पकड़ने में सफलता प्राप्त की। आरोपी आसाबाबू की निशानदेही पर पुलिस ने उसके निजी घर से एक आटोमेटिक पिस्तौल और सजीव गोलियां बरामद करने में सफलता प्राप्त की। पुलिस उससे लगातार पूछताच कर उनके अन्य साथियों और अन्य हथियारों के बारे में जानने का प्रयास कर रही है।


उल्लेखनीय है कि आसाबाबू इस पूरे अंचल में आंतक का पर्याय बन गया था। जिले में कहीं भी बड़ी डकैती होती तो सबका शक आसाबाबू की ओर ही जाता। वह इतना खूंखार है कि उसकी फोटो कर्नाटक के हर थाने में लगी हुई है। कई बार गिरफ्तार होकर जेल यात्रा कर चुके आसाबाबू का सबसे कुख्यात कारनामा था कानूनविज्ञ बिनय घोष के घर में डकैती और उनकी हत्या। साथ ही उसने एक छोटी-सी बात को लेकर अपने गांव के प्रधानाध्यापक को इतनी बुरी तरह पिटाई की कि वे महीनों अस्पताल में भर्ती रहे। साथ ही एक बार बम के साथ उसे आर्मी ने पकड़ा। तत्पश्चात उसे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार कर लगभग एक वर्ष के लिए जेल भेज दिया गया। इस तरह बार-बार गिरफ्तार होने के बाद भी बड़े-बड़े कारनामा करना उसकी नियति बन गई थी। इधर एक बार पुनः आसाबाबू की गिरफ्तारी से पुलिस ने राहत की सांस ली है, लेकिन यह कब तक के लिए है, यह कोई नहीं जानता।