गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के नेता बिमल गुरुंग को एक और झटका लगा है। दार्जिलिंग की कोर्ट ने बुधवार को बिमल गुरुंग व पार्टी के 7 अन्य नेताओं के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद गुरुंग व जीजेएम के अन्य नेताओं का बचना मुश्किल हो जाएगा।

कहा जा रहा है कि गुरुंग व जीजेएम के कई नेता सिक्किम में छिपे हुए हैं। गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस को गुरुंग की तलाश में सिक्किम में छापे मारने में मदद मिलेगी। गिरफ्तारी की संभावना इसलिए भी है क्योंकि 12 सितंबर को सिलीगुड़ी के उत्तरकन्या में सरकार के साथ प्रस्तावित दूसरी दौर की द्विपक्षीय वार्ता से गुरुंग कैंप को दूर रखा जाएगा।

पिछले हफ्ते बंगाल पुलिस ने सिक्किम में नामची के करीब एक रिजॉर्ट में छापा मारकर जीजेएम को कुछ नेताओं को गिरफ्तार किया था। जब उन्हें बंगाल ले जाया जा रहा था तो सिक्किम पुलिस वहां आ धमकी और उन्हें जीजेएम नेताओं को बंगाल नहीं ले जाने दिया। सिक्किम पुलिस का कहना था कि बंगाल पुलिस के पास अरेस्ट वारंट नहीं था। बंगाल की पुलिस बिना जानकारी दिए उनके राज्य में घुस गई। बंगाल पुलिस ने छापा तब मारा था जब रिजॉर्ट में सेंट्रल कमेटी की बैठक चल रही थी।

स्पेशल एसपी,नॉर्थ (सीआईडी) अजय प्रसाद ने बताया कि अरेस्ट वारंट मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दार्जिलिंग ने जारी किया है। सीबीआई ने मंगलवार को अरेस्ट वारंट के लिए अपील की थी।  प्रसाद ने बताया कि अरेस्ट वारंट 8 जून को दार्जिलिंग सदर पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर को लेकर जारी किया गया है। पांच दिन पहले ही सीआईडी ने गुरुंग, प्रकाश गुरुंग व रोशन गिरी के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया था। सीआईडी के एक अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तारी वारंट जारी होने का मतलब है कि कोई भी राज्य,जहां आरोपी छिपे हुए हो सकते हैं, कानून के तहत आरोपियों को सीआईडी को सौंपने के लिए बाध्य है।

8 जून को दार्जिलिंग में उस वक्त हिंसा फैल गई थी जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कैबिनेट की मीटिंग ले रही थी। जीजेएम के जिन नेताओं के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया गया है उनमें गुरुंग की पत्नी आशा गुरुंग, जो गोरखा जनमुक्ति नारी मोर्चा की संयोजक है, जीजेएम के महासचिव रोशन गिरी, पार्टी के युवा मोर्चा के अध्यक्ष प्रकाश गुरुंग और महासचिव अमरित योनजोन,दार्जिलिंग म्यूनिसिपालटी के चेयरमैन डी.के.प्रधान, मोर्चा नेता अशोक छेत्री व तिलक रोका के खिलाफ जारी किया गया है।

8 जून को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दार्जिलिंग हिल्स से करीब 200 मीटर दूर कैबिनेट मीटिंग कर रही थी तब जीजेएम नेताओं की पुलिस से भिड़़ंत हो गई थी। पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक संघर्ष में सुरक्षा बलों के 45 जवान घायल हो गए थे। संघर्ष के दौरान पुलिस बूथ को आग के हवाले कर दिया गया था। पुलिस के 15 वाहन और एक सरकारी बस को भी जला दिया गया था। इसके बाद दार्जिलिंग, घूम और कुर्सियांग में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सेना लगा दी गई थी। 9 जून को पुलिस ने दार्जिलिंग सदर पुलिस थाने में केस दर्ज किया। बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई।