आज हम आपको एक ऐसी मछली के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी ब्लैक मार्केट में 2.25 करोड़ रुपए तक कीमत है। इस मछली का नाम अरोवाना है। इसे ड्रैगन फिश भी कहते हैं। सबसे खास बात तो यह है कि यह ऐसी नर मछली है जो कि अपने अंडों को मुंह में 50 दिनों तक रखती है, ये अपना मुंह तब खोलती है जब इसके बच्चे थोड़े बड़े हो जाते हैं। इन 50 दिनों तक यह कुछ खाती-पीती नहीं है। बता दें कि फेंग शुई के हिसाब से इसे घर में रखने से तरक्की होती है। पैसा आता है, संपत्ति बढ़ती है। परिवार में प्यार बढ़ता है।

अरोवाना की कई प्रजातियां हैं, लेकिन सबसे ज्यादा मांग एशियन अरोवाना की होती है. ये सबसे ज्यादा दक्षिण-एशियाई देशों में सबसे ज्यादा पाई जाती हैं। इनके अलग-अलग रंगों के आधार पर इनका नाम रखा गया है। इन मछलियों को चीनी संस्कृति में काफी ज्यादा महत्व दिया जाता है। बता दें कि इंडोनेशिया, वियतनाम, म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया और मलेशिया में हरे रंग की यह मछली मिलती है। वहीं सिल्वर एशियन बोर्नियो में पाई जाती है, लेकिन इसकी कई सब-वैराइटी भी होती हैं, जैसे- ग्रेट टेल सिल्वर, पिनोह अरोवाना और यलो-टेल अरोवाना। इसके अलावा इंडोनेशिया के उत्तरी सुमात्रा में रेड-टेल्ड गोल्डेन अरोवाना मिलती है। मलेशिया में गोल्ड क्रॉसबैक, ब्लू मलायन और बुकित मेरा ब्लू अरोवाना मिलती है।

अरोवाना मछली का आकार 35 इंच तक बढ़ता है, यानी इसे घर में रखने के लिए बड़े एक्वेरियम की जरूरत होती है। अन्य मछलियों की तुलना में अरोवाना मछली के प्रजनन का समय लेट होता है। ये 3 से 4 साल में एक बार संबंध बनाते हैं। मादा अरोवाना एक बार में 30 से 100 अंडे देती है, जो अन्य मछलियों के अंडों की तुलना में बड़े होते हैं। जैसे ही मादा अंडे को बाहर निकालती है, तुरंत ही नर अरोवाना उन्हें उठाकर अपने मुंह में रख लेता है। इस प्रक्रिया को माउथ ब्रूडिंग कहते हैं। माउथ ब्रूडिंग की इस प्रक्रिया में नर मछली अपने मुंह के अंदर ही लार्वा और अंडों को रखती है। अंडों की मुंह में हैचिंग होती है, जबकि  लार्वा सुरक्षित रहते हैं। ये प्रक्रिया करीब 50 दिनों तक चलती है। इतने दिनों तक नर अरोवाना मछली न तो कुछ खाता है, न पीता है।  जब तक बच्चे इस लायक नहीं हो जाते कि वो खुद अपना खाना-पीना खोज सकें और सुरक्षित रह सकें। तब तक यह उनका ख्याल रखता है।

एशियन अरोवाना की एक प्रजाति सिल्वर अरोवाना है। यह ज्यादातर साउथ अमेरिकी देशों के तटों में पाई जाती है। इसे मंकी फिश  भी कहा जाता है, क्योंकि ये बंदर की तरह उछलकर अपने शिकार पर हमला करती है। ये कई बार छोटे पक्षियों, चमगादड़ों, चूहों यहां तक की सांपों को भी खा जाती है। हालांकि इनका मुख्य भोजन क्रस्टेशियन, कीड़े, छोटी मछलियां होती हैं।