भारत-बांग्लादेश सीमा पर मवेशी तस्कर सीमा सुरक्षा बल(सीसुब) के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। बल द्वारा जारी कारवाई के बावजूद तस्कर मवेशी तस्करी के असफल प्रयास को नहीं छोड़ रहे। आलम यह है कि सीसुब जवान तस्करों की गतिविधियों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। मालूम हो कि बड़ी तादात में बल के जवानों को चुनावी ड्यूटी में लगाया गया है। कई कंपनियों को राज्य के बाहर भी भेजा गया है। इसके बावजूद भी सीमा की निगरानी में कोई कोताही नहीं बरती जा रही।


सीमा पर आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगाने में सीमा प्रहरियों के लिए पिछला पंद्रह दिन काफी चुनौती भरा रहा। यहां तैनात सीसुब जवानों ने कई विशेष अभियान भी चलाए, जिसमें बल को अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर कई कामयाबी भी मिली। इस दौरान बड़ी संख्या में मवेशियों को मुक्त कराया गया तथा तस्करों के पास अन्य सामान भी जब्त किए गए। सीसुब की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि सीमाई  इलाकों में तलाशी के दौरान कई वाहनों से बड़ी तादाद में मवेशियों को मुक्त कराया गया।


ये वाहन असम की सीमा ग्वालपाड़ा और खानपाड़ा की तरफ से आए थे। बरामद मवेशियों को बांग्लादेश में तस्करी के लिए लाया गया था। इस कड़ी में गत 14 अप्रैल को जात्राकोना सीमाई  चौकी के अंतर्गत पांच ट्रकों से 65 मवेशियों को मुक्त कराया गया। मवेशियों को ट्रकों में बुरी तरह लादकर लाया गया था। अभियान के दौरान 17 लोगों को भी पकड़ा गया। ये सभी असम के ग्वालपाड़ा के रहने वाले हैं।


उनके पास से एक एक करोड़ से अधिक रुपए के सामान भी जब्त किए गए हैं। विज्ञप्ति के अनुसार 98 मामलों में सीसुब को 144 मवेशी, 314370 बीड़ी के बंडल, 1527874 सुपारी के थैले आदि बरामद करने में सफलता मिली। सीसुब की मेघालय फ्रंटियर ने राज्य से लगने वाली  सीमा पर जवानों को विशेष रूप से  सतर्क कर दिया है।