अलग गोरखालैंड राज्य को लेकर पिछले कई दिनों से दार्जिलिंग जिले के मिरिक में जारी हिंसा के पीछे नेपाली माओवादियों के हाथ हैं। खुफिया विभाग को इस संबंध में ठोस सुराग मिले हैं। मिरिक को अशान्त करने की साजिश के तहत सोमवार और मंगलवार को तोडफ़ोड़ और आग लगाने की घटनाएं हुईं। खुफिया पुलिस का दावा है कि ये सब नेपाली माओवादियों की करतूत है। 

सूत्रों के अनुसार नेपाल सीमा से सटे उकाईति सात माइल इलाके के व्यवसायी निपचान तमांग ने कथित तौर पर हमले की ब्लूप्रिंट तैयार की थी। नेपाल के झालार, मेची और समालबुंग इलाकों से आए 60 से 65 माओवादी पिछले चार दिनों से मिरिक के बौध गुफा के निकट परित्यक्त घर में छिपे हुए हैं। 

मिरिक में गोजमुमो समर्थक आशीष तमांग की मौत के विरोध में मंगलवार को आयोजित जुलूस में नेपाल से आए माओवादी भी शामिल थे। उन्होंने लोगों को हिंसा के लिए उकसाया। खुफिया पुलिस पता लगा रही है कि घायल आनंद शर्मा को मिरिक की बजाय नेपाल के अस्पताल में क्यों भर्ती कराया गया है। नेपाली माओवादी दार्जिलिंग में आने और हमला कर भागने के लिए इन्हीं रास्ते का इस्तेमाल करते हैं।