मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा कि राज्य सरकार मादक पदार्थों के खिलाफ युद्ध की रणनीति के तौर पर सीमावर्ती इलाकों में अफीम की खेती को खत्म करने के लिए सेना तथा असम राइफल्स की मदद ले रही है। मुख्यमंत्री ने कहा म्यामार के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास के इलाकों में अफीम की खेती के लिए हजारों हेक्टेयर भूमि का इस्तेमाल होता है। दक्षिण पूर्वी एशिया में मादक पदार्थों की तस्करी के लिए कुख्यात गोल्डन ट्राएंगल के समीप उत्तरपूर्वी राज्य मादक पदार्थों और सिरिंज के जरिए मादक पदार्थ लेने के कारण एचआईवी के बड़े मामलों का दंश झेल रहा है।

सिंह ने कहा कि गोल्डन ट्राएंगल के जरिए अन्य देशों में अफीम भेजी जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम मणिपुर में अफीम की खेती को खत्म करने के लिए सेना तथा असम राइफल्स की मदद ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि अफीम की खेती करने वालों को लेमन ग्रास की खेती करने के लिए कहा जा रहा है। राज्य के दक्षिणी हिस्से में जौपी गांव में अफीम की खेती करने वाले लालबोई ने काकचिन शहर में समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि वह अपने गांव में तथा उसके आसपास कई अन्य लोगों के साथ अपनी आजीविका के लिए अफीम की खेती करते हैं। उन्होंने बताया कि उनके इलाके में अफीम की खेती करने वाले करीब 150 लोग हैं। उन्होंने कहा कि असम राइफल्स हमारी मदद कर रही है और हमें सिखा रही है कि कैसे लेमन ग्रास की खेती की जाए ताकि हम अफीम की खेती छोड़ दें।

बता दें कि लेमन ग्रास एक खुशबूदार उष्णकटिबंधीय घास है, जिससे तेल निकलता है, जिसमें नींबू की खुशबू आती है और इसका बड़े पैमाने पर एशियन कुकिंग और परफ्यूम तथा दवा बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस साल 600 तस्करों को गिरफ्तार किया गया और उन पर मुकदमा चलाने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें बनाई गई है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार और सुरक्षाबलों ने लोगों की नशे की आदत को छुड़वाने के लिए भी परियोजनाएं शुरू की है।