केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर (Union Territory Jammu and Kashmir) के बारामूला-19 इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल अजय चांदपुरिया ने शनिवार को कहा कि हाल ही में नियंत्रण रेखा (LOC) के पास हुए मुठभेड़ में मारे गए पाकिस्तानी घुसपैठियों के पास से बरामद हथियार आमतौर पर यहां इस्तेमाल नहीं किए जाते हैं। 

उन्होंने कहा,''यहां से बरामद हथियार का उपयोग पिछले साल अगस्त में अफगानिस्तान में किया गया था, जो अमेरिकी सैनिक छोड़कर गए थे।' उन्होंने कहा कि जब अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिक मौजूद थी, तब कश्मीर घाटी में भी स्थिति थोड़ी अलग थी लेकिन पिछले साल अगस्त के बाद अमेरिकी सैनिकों के अफगानिस्तान छोडऩे के बाद वहां इस्तेमाल हो रहे आधुनिक हथियार पाकिस्तान के माध्यम से एलओसी के पास भेजा गया। 

उन्होंने कहा कि गुप्त सूचना मिली थी कि पाकिस्तान घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों के माध्यम से इस तरह के हथियारों को भारत में पहुंचाने की कोशिश करेगा। उन्होंने कहा कि करीब 100 से 130 आतंकवादी इस तरफ घुसपैठ करने के लिए लॉन्च पैड पर इंतजार कर रहे हैं। हालांकि सैनिकों की चौकसी और नियंत्रण रेखा पर हमारे खुफिया नेटवर्क की तैनाती के कारण वे घुसपैठ करने में सफल नहीं हो रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए आतंकवादियों को सीमा पार भेजने की लगातार कोशिश कर रहा है। मेजर जनरल चांदपुरिया ने कहा कि हमारी खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक इस समय कश्मीर घाटी में करीब 150 से 200 आतंकवादी सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि उनमें से 40 से 45 पाकिस्तानी आतंकवादी हैं। उन्होंने कहा इनमें उन लोगों को शामिल नहीं किया गया है, जिन्हें गुमराह करने के बाद आतंकवादी बनने के लिए भेजा जा रहा है। 

उनमें से कुछ का इस्तेमाल हथगोले फेंकने और सुरक्षा बलों पर गोलियां चलाने के लिए किया जा रहा है जिन्हें हम 'हाइब्रिड आतंकवादी' या 'अज्ञात आतंकवादी' कहते हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में आतंकवादियों के लिए प्रशिक्षण शिविर फिर से काम कर रहे हैं। मेजर जनरल चांदपुरिया ने कहा कि उत्तरी कश्मीर में स्थिति सामान्य है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद में स्थानीय लोगों की भर्ती में कमी आई है और पहले की तुलना में आतंकवादियों की मौजूदगी कम हुई है।