रतन टाटा ने हाल ही में एक कंपनी में निवेश किया है जो अपने आप में एक चौंकाने वाली बात है। यह बात महज दो साल पुरानी है। बल्कि वह एक स्टार्टअप है, जिसे अर्जुन देशपांडे ने शुरू किया है। ये स्टार्टअप है 'जेनरिक आधार'। वैसे तो ये पता नहीं है कि ये डील कितने में हुई है, लेकिन बताया जा रहा है कि टाटा ने करीब 50 फीसदी हिस्सा खरीद लिया है। आइए आपको बताते हैं इस लड़के और उसकी कंपनी के बारे में कुछ खास बातें।
अर्जुन की उम्र अभी केवल 18 साल है, जिन्होंने दवा का खुदरा कारोबार करने वाली कंपनी जेनरिक आधार शुरू की है। जब वह 16 साल के तब उन्होंने इस कंपनी की शुरुआत की थी।
सीधे मैन्युफैक्चरर्स से सामान लेकर रिटेलर्स को बेचती है। इस वजह से रिटेलर्स की कमाई करीब 20 फीसदी बढ़ गई है। वर्तमान में इस कंपनी का रेवेन्यू करीब 6 करोड़ रुपये हैं और अगले तीन सालों में इसे 150-200 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
अर्जुन को अपनी मां से प्रेरणा मिली है, जो इंटरनेशनल फार्मा बिजनेस से जुड़ी हुई हैं। वह अपने स्कूल की छुट्टियों में अमेरिका, वियतनाम, चीन और दुबई जैसे देशों में जाया करते थे, जिस दौरान उन्हें ये कंपनी खोलना का आइडिया सूझा। वह बहुत से आयातकों, डिस्ट्रीब्यूटर्स और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से भी मिलते थे, जिससे पता चला कि अन्य देशों में सस्ती दवाएं मिलती हैं। उन्होंने जब मां से पूछा कि भारत में दवाइयां महंगी क्यों हैं तो पता चला कि भारत में अधिकतर जेनरिक दवाएं ब्राड के जरिए प्रमोट की जाती हैं, इसलिए वह महंगी होती हैं।
जेनरिक कंपनी के जरिए अर्जुन देशपांडे एक मिशन पर काम कर रहे हैं। वह चाहते हैं कि बुजुर्गों और पेंशनभोगियों को जरूरत की दवाई कम से कम कीमत में मिले। वह कहते हैं कि करीब 60 फीसदी आबादी महंगी होने की वजह से दवा नहीं खरीद पाती है, इसलिए वह कीमत को घटाना चाहते हैं।
अर्जुन का आइडिया बिल्कुल यूनीक है। उनका मॉडल फार्मेसी-एग्रीगेटर बिजनस मॉडल है। ये यूनीक आइडिया ही है, जिसमें रतन टाटा जैसे बड़े कारोबारी को भी लुभा लिया, जिसके चलते उन्होंने जेनरिक आधार कंपनी में निवेश किया है।
अर्जुन देशपांडे ने कोरोना से जंग के लिए पीएम केयर्स फंड में 3 महीने की सैलरी भी दान की थी। उस समय भी अर्जुन की खूब चर्चा हो रही थी।