असम पब्लिक सर्विस कमीशन के कैश फॉर घोटाले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री निलमणी सेन डेका के बेटे राजारशी सेन डेका को रविवार को न्यायिक हिरासत में भेजा दिया गया। डेका ने 13 नवंबर को सरेंडर किया था। पुलिस ने घोटाले में शामिल अधिकारियों की धरपकड़ के लिए 8 नवंबर को ऑपरेशन लॉन्च किया था। तब से डेका फरार था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक 14 दिन बाद डेका को फिर कोर्ट में पेश किया जाएगा। आपको बता दें कि घोटाले में पुलिस ने 23 राजपत्रित अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से 22 की पुलिस रिमांड पूरी हो चुकी है। सभी को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है। कैश फॉर जॉब घोटाले में कुल 25 आरोपी हैं। इनमें से दो अभी भी फरार हैं। दोनों के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया गया है। कहा ज रहा है कि दोनों अधिकारी जल्द ही कोर्ट में सरेंडर कर सकते हैं।

सूत्रों का कहना है कि आरोपी अधिकारियों ने पूछताछ के दौरान कुछ नामों का खुलासा किया है जिन्होंने दलाल की भूमिका निभाई थी। डिब्रूगढ़ पुलिस ने उन 12 लोगों की धरपकड़ के लिए ऑपरेशन लॉन्च किया है जिन्होंने कथित रूप से दलाल की भूमिका निभाई थी। इन लोगों ने उम्मीदवारों से अलग अलग संपर्क किया था और उनसे डील की थी। जितनी ऊंची पोस्ट उतनी ज्यादा घूस। सरकारी नौकरी के लिए 15 लाख से 40 लाख तक की घूस दी गई थी। डील फाइनल होने के बाद इन दलालों ने उम्मीदवारों को असम पब्लिक सर्विस कमीशन के पूर्व चेयरमैन व घोटाले के मुख्य आरोपी राकेश पॉल से मिलवाया। राकेश पॉल ने सलेक्शन मेंटेंपरिंग कर उनकी मदद की। एक ऐसे ही दलाल की पहचान सुदीप दास के रूप में हुई है।
दास 2013-15 के दौरान हुए कैश फॉर जॉब घोटाले की ज्यादातर डील में शामिल था। दास शहर के आनंद नगर इलाके का निवासी है। पिछले साल जब राकेश कुमार पॉल को पुलिस ने गिरफ्तार किया तो दास फरार हो गया। आनंद नगर इलाके के एक निवासी ने कहा, किसी ने उसे लंबे अरसे नहीं देखा है। हालांकि उसके परिवार के सदस्य यहीं रह रहे हैं। सूत्रों का मानना है कि दास काफी पहले ही असम छोड़कर भाग गया था। जांच में खुलासा हुआ है कि दास राकेश पॉल के संपर्क में था। पॉल की उससे मुलाकात एयरपोर्ट पर हुई थी जहां सुदीप कथित रूप से ग्राउंड स्टाफ के सदस्य के रूप में काम कर रहा था।