असम पब्लिक सर्विस कमीशन के कैश फॉर जॉब घोटाले में जेल भेजे गए 14 राजपत्रित अधिकारियों को सेवा से निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के मीडिया सलाहकार ऋषिकेश गोस्वामी ने बताया कि जेल जाने वाले सभी लोगों को सस्पेंड किया गया है। असम के पुलिस महानिदेशक मुकेश सहाय ने कहा कि पुलिस को अधिकतम 14 दिन की रिमांड मिल सकती है। इसके बाद सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वक्त आने पर गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों को भी कोर्ट में पेश किया जाएगा। आपको बता दें कि असम सिविल सर्वि के इन अधिकारियों की 14 दिन की  पुलिस रिमांड पूरी हो गई थी। इसके बाद उन्हें स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया। जस्टिस ए.भट्टाचारजी ने सभी को 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया। इन अधिकारियों को 8 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था।

इन पर गैर कानूनी तरीकों से नौकरी हासिल करने का आरोप है। इनमें से सात आरोपी असम सिविल सर्विस के अधिकारी हैं जबकि पांच असम पुलिस सर्विस व दो एलाइड सर्विसेज के अधिकारी हैं। पुलिस ने असम सिविल सर्विस के जिन अधिकारियों को गिरफ्तार किया उनमें पल्लबी सरमा चौधरी, दीपक खानिकार, देबाजीत बोरा, अनिरुद्ध रॉय, हिमांग्सु चौधरी, कुणाल दास और डी.बोरगोयारी शामिल है। सबीराम इमरान, जयंता कुमार नाथ, हर्ष ज्योति बोरा, हेमंता सैकिया व जतिन्द्र प्रसाद बरुआ असम पुलिस सर्विस के अधिकारी हैं। अमरजीत दास व राजू साहा एलाइड सर्विसेज के अधिकारी हैं। महाजन ने कहा कि बुधवार को आरोपियों ने स्पेशल कोर्ट में जमानत याचिकाएं दाखिल की। असम पुलिस ने कैश फॉर जॉब घोटाले में अभी तक कुल 23 अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। ये सभी राजपत्रित अधिकारी हैं।

घोटाले में कुल 25 आरोपी हैं। इनमें से 2 अभी भी फरार हैं। जो अधिकारी फरार हैं उनमें असम सिविल सर्विस ऑफिसर निशामोनी डेका व असम पुलिस सर्विस के ऑफिसर राकेश गुप्ता शामिल हैं। दोनों के खिलाफ पुलिस लुक आउट नोटिस जारी कर चुकी है। पुलिस का कहना है कि 25 अधिकारियों की उत्तर कुंजियों की फोरेसिंक जांच में अनियमितता की पुष्टि हुई है। अक्टूबर 2016 में नौकरी के लिए आवेदन करने वाली अंशुमिता गोगोई ने डिब्रूगढ़ पुलिस थाने में केस दर्ज कराया था। अंशुमिता ने शिकायत में आरोप लगाया था कि इंजीनियर नबाकांता पातिर ने, कथित रूप से 10 लाख रुपए की घूस मांगी थी। उसने ऑफर दिया था अगर 10 लाख रुपए दिए तो असम पब्लिक सर्विस कमीशन के जरिए उन्हें सरकारी नौकरी मिल सकती है।

अंशुमिता की शिकायत के बाद पुलिस ने जाल बिछाया और पातिर को अंशुमिता के हाथों रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। पातिर के कबूलनामे के आधार पर पुलिस ने पिछले साल 4 नवंबर को असम पब्लिक सर्विस कमीशन के पूर्व चेयरमैन राकेश कुमार पॉल को गिरफ्तार किया।