असम में एनआरसी की सूची से बाहर किए गए बच्चों को कथित तौर पर हिरासत में लेने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। यह वो बच्चे हैं जिनके माता-पिता के नाम तो एनआरसी की सूची में हैं, लेकिन उनके नाम नहीं हैं। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर सुनवाई करेगा।

चीफ जस्टिस ने कही ये बात

चीफ जस्टिस की बेंच ने अटॉर्नी जनरल के जरिए केंद्र को जवाब देने के लिए कहा है। चीफ जस्टिस ने कहा है कि पहले हमें तथ्यों को देखना होगा। अभी बहुत मुश्किल हालात हैं। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि मैं बच्चों को डिटेंशन सेंटर्स भेजे जाने और उन्हें माता-पिता से अलग किए जाने के बारे में नहीं सोच सकता। मुझे बच्चों के डिटेंशन सेंटर्स में रखे जाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है।


केंद्र से मांगा है जवाब

चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने केंद्र और राज्य सरकार को जवाब देने के लिए 4 हफ्ते का समय दिया है। अटॉर्नी जनरल ने ये भी कहा कि उन बच्चों को डिटेंशन सेंटर्स नहीं भेजा जाएगा जिनके माता-पिता को एनआरसी के माध्यम से नागरिकता प्रदान दी गई है।

इतने लोग हुए लिस्ट से बाहर

बता दें कि असम एनआरसी की लिस्ट में 19 लाख से ज्यादा लोग शामिल नहीं हो सके हैं। 3 करोड़ 11 लाख 21 हजार लोगों को एनआरसी की फाइनल लिस्ट में जगह मिली थी और 19,06,657 लोग इससे बाहर हो गए थे।


सरकार ने दिया 120 का समय

असम में एनआरसी की अंतिम सूची 31 अगस्त को जारी हुई। इस सूची के मुताबिक असम में 3,11,21,004 लोग ही भारतीय नागरिकता साबित कर पाए हैं, जबकि प्रमाणपत्रों के अभाव में 19,06,677 लोगों को सूची से बाहर कर दिया गया था। हालांकि सूची से बाहर हुए लोगों को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए 120 दिन का और समय दिया गया था। इसके साथ ही सरकार ने ये भी कहा कि ऐसे लोगों को कानूनी मदद भी मिलेगी और जो लोग अपील के बाद भी नागरिकता साबित नहीं कर पाएंगे उन्हें सरकार डिंटेशन सेंटर में रखेगी।

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